बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
DevanagariHindipublished350 पृष्ठ
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( ३७ ) १८५ 'आदर्श' हाथ हाथ का यह मिश्रण इनके चरित्र एवं व्यवहार में भी देखा जा सकता है। ऐसे व्यक्ति किसी भी कार्य को जितनी उतावली से प्रारम्भ करते हैं, धीरे-धीरे उस कार्य के प्रति इनकी रुचि समाप्त हो जाती है और उस कार्य को बीच में ही छोड़कर ये नए कार्य को प्रारम्भ कर देते हैं। इनके दिमाग में निरन्तर सन्देह, आशंका और भ्रम का वातावरण बना रहता है। ऐसे व्यक्तियों का चित्त अस्थिर होता है तथा किसी भी कार्य में पूरी तरह से सफलता न मिलने के कारण ये शीघ्र ही निराश हो जाते हैं और इसी वजह से ये धीरे-धीरे आत्म-केन्द्रित बन जाते हैं। ऐसे व्यक्तियों को जीवन में सफलता बहुत अधिक प्रयत्नों के बाद ही मिलती है।