भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २६८ ) चतुर्मुख योग : परिभाषा : यदि मणिबन्ध के ऊपर मछली की सी आकृति हो तो वह चतुर्मुख योग होता है। फल : जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह ऊंची शिक्षा प्राप्त, चतुर, एवं दूरदर्शी व्यक्ति होता है। वह कई कलाओं को भली प्रकार से जानता है तथा वह उदार, गुणवान, उच्च पदाधिकारी और मधुर भाषी होता है। (चित्र विवरण: चतुर्मुख योग) अंशावतार योग : यदि हथेली में कहीं पर भी ग्राम का चिह्न दिखाई दे तो अंशावतार योग होता है । अंशावतार योग रखने वाला व्यक्ति राजा के समान होता है। तथा अपने कार्यों से समाज में सम्मानित होता है। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में कई स्त्रियों के संपर्क में रहता है तथा उनका भोग करता है। कला पूर्ण वस्तुओं का शौकीन यह व्यक्ति कलाकारों का सम्मान करता है तथा अपने आप में धनवान होता है । (चित्र विवरण: अंशावतार योग) सार्वभौम योग : यदि हाथ में कहीं पर भी बाण का चिह्न दिखाई दे तो वह सार्वभौम योग होता है। जिसके हाथ में कहीं यह योग होता है वह बचपन में यद्यपि गरीब होता है परन्तु यौवनावस्था मे पूर्णतः सुखी एवं सम्पन्न होता है तथा उसके जीवन की सभी भौतिक इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं । (चित्र विवरण: सार्वभौम योग)