बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहाथ-हथेली, उंगलियां तथा उंगलियों के अग्रभाग
हाथ के अध्ययन में उंगलियां और हाथ की आकृति विशेष महत्व रखती हैं। बड़ा हाथ अपने आप में विशिष्ट हाथ कहलाता है। ऐसे व्यक्ति सूक्ष्मदर्शी और व्यव- हार कुशल होते हैं। इसके विपरीत छोटे हाथ वाले व्यक्ति क्रोधी, सनकी और अस्थिर स्वभाव वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति जीवन में पूरी तरह से सफलता प्राप्त नहीं कर सकते। यहां और आगे के पृष्ठों में भी जहां हाथ का वर्णन आएगा वहां हाथ से तात्पर्य मात्र हथेली से ही लिया जाना चाहिए।
हथेली
उंगली की जड़ से पहले मणिबन्ध तक हथेली की लम्बाई कहलाती है तथा अंगूठे की जड़ से दूसरे अन्तिम सिरे तक के भाग को हथेली की चौड़ाई कहा जाता है। इस सारे भाग पर जो भी चिह्न होते हैं, वे सभी चिह्न हस्तरेखा विशेषज्ञ के लिए अत्यन्त आवश्यक होते हैं। १. संकड़ी हथेली : ऐसे व्यक्ति सामान्यतः कमजोर प्रकृति वाले होते हैं। ये व्यक्ति अपने ही स्वार्थ को सर्वाधिक महत्व देते हैं और अपने स्वार्थ साधन में यदि सामने वाले व्यक्ति का अहित भी हो जाता है तो ये इस बात की परवाह नहीं करते। ऐसे व्यक्तियों पर आसानी से विश्वास करना ज्यादा उचित नहीं कहा जा सकता। २. चौड़ी हथेली : जिन व्यक्तियों के पास चौड़ी हथेली होती है, वे चरित्र की दृष्टि से दृढ़ निश्चयी तथा मजबूत हृदय वाले होते हैं। उनकी कथनी और करनी में कोई भेद नहीं होता और एक बार जो ये बात अपने मुंह से कह देते हैं उस पर ये खुद भी दृढ़ रहते हैं और यदि किसी को इस प्रकार का कोई आश्वासन दे देते हैं तो उसे यथासंभव पूरा करने की कोशिश करते हैं। ३. अत्यधिक चौड़ी हथेली : ऐसे व्यक्ति सामान्यतः अस्थिर प्रकृति के होते हैं। इसकी पहचान यह है कि इन लोगों की हथेली लम्बाई की अपेक्षा चौड़ी ज्यादा होती है। ऐसी हथेली वाले व्यक्ति तुरन्त निर्णय नहीं ले पाते और किसी भी कार्य को करने से पूर्व बहुत अधिक सोचते-विचारते रहते हैं।