भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ३२ ) ४. पीला : पीले रंग की हथेली रोग की सूचक होती है। जिस व्यक्ति की हथेली पीली दिखाई दे तो समझ लेना चाहिए कि यह व्यक्ति रोगी है अथवा इसके खून में किसी न किसी प्रकार का कोई विकार है। ऐसा व्यक्ति अस्थिर स्वभाव का तथा चिड़चिड़ा होता है एवं संकीर्ण बुद्धि का होने के साथ-साथ कमजोर मस्तिष्क वाला भी कहा जा सकता है। ५. चिकनी त्वचा : हथेली की त्वचा का भी अपनेआप में अत्यन्त ही महत्त्व होता है। जिस व्यक्ति की हथेली की त्वचा चिकनी और मुलायम होती है, वह व्यक्ति सहृदय तथा निरन्तर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति का लक्ष्य हमेशा स्पष्ट होता है और वह निरन्तर उस ओर बढ़ता रहता है। जीवन में अधिक- तर ऐसे ही व्यक्ति सफल होते देखे गये हैं। ६. सूखी त्वचा : जिन व्यक्तियों की हथेली की त्वचा या चमड़ी सूखी सी होती है, वे व्यक्ति सामान्यतः रोगी और अस्थिर प्रकृति वाले होते हैं। वे स्वयं किसी प्रकार का कोई निर्णय नहीं ले पाते और इनको जिस प्रकार की भी सलाह दी जाती है उसी के अनुसार ये कार्य करने लग जाते हैं। इनके कार्यों में किसी प्रकार का कोई सामंजस्य नहीं रहता। मानसिक तथा शारीरिक दोनों ही दृष्टियों से ये लगभग बीमार से ही रहते हैं। जीवन में सफलता इनको बहुत अधिक प्रयत्न करने के बाद ही मिलती है। ७. रूखी त्वचा : अत्यधिक सूखी तथा रूखी त्वचा व्यक्ति की कमजोरी तथा लीवर की बीमारी को स्पष्ट करती है। ये व्यक्ति सन्देहशील प्रकृति के होते हैं तथा दुर्बल मनोवृत्ति के होने के कारण जीवन में प्रायः असफल ही रहते हैं। नाखून हथेली का अध्ययन करने के साथ ही साथ उंगलियों के नाखूनों पर भी विशेष विचार करना चाहिए। साधारणतः ये नाखून प्रत्येक व्यक्ति की उंगली के अग्रभाग में होते हैं और उंगली की रक्षा करने में सहायक होते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से नाखूनों के दो कार्य हैं। (१) उंगलियों के पोरों की रक्षा करना, जिससे बाहरी आघात से उंगलियां कट न जाएं और उंगलियों की सुन्दरता को बढ़ाने में ये नाखून सहायक होते हैं। (२) ये नाखून विद्युत प्रवाहक होते हैं। वायुमण्डल में जो नैसर्गिक विद्युत होती है, इन नाखूनों के माध्यम से ही शरीर में प्रवेश करती है। यह ही नहीं अपितु अन्य ग्रहों की रश्मियां भी इन्हीं नाखूनों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर व्यक्तियों को सुचारु रूप से कार्य करने में सक्षम रखती हैं।