बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३३७. ) पंडित जी ने बिना सिर उठाए ही आगे कहा, मुझे ऐसा दिखाई दे रहा है आपकी स्वास्थ्य रेखा प्रारम्भ में जंजीरवार हो गई है और आगे इस रेखा से छोटी- छोटी रेखाएं निकलती रही हैं परन्तु ये रेखाएं हथेली में नीचे की ओर बढ़ी हैं जो कि शुभ नहीं कही जा सकतीं। ये रेखाएं इस तथ्य की परिचायक हैं कि आपका स्वास्थ्य भी सामान्यतः कमजोर रहा होगा और निरन्तर कोई न कोई छोटी-मोटी बीमारी आपको बनी ही रही होगी। हकीकत में देखा जाय तो जीवन में बीसवें वर्ष से इकतालीसवें वर्ष तक आपका स्वास्थ्य बराबर कमजोर रहा होगा और घर में हर समय डाक्टर का आना जाना बना रहा होगा। क्योंकि इस स्वास्थ्य रेखा में जो नीचे की तरफ रेखाएं गई हैं उसमें अन्तिम रेखा ४१ वर्ष को ही स्पष्ट करती है। अतः तब तक आपका स्वास्थ्य कमजोर रहा होगा। इन रेखाओं का सम्बन्ध चन्द्र पर्वत तथा शुक्र पर्वत से रहा है। चन्द्र पर्वत से सम्बन्ध होने के कारण ऐसा ज्ञात होता है कि आपकी परेशानियां पेट से संबंधित रही होंगी। इसमें दुर्बलता एनीमिया गैस्टिक ट्रबल, अपच, आदि रोग सम्भव हैं तथा शुक्र पर्वत से जो सम्बन्ध बना है उससे ऐसा ज्ञात होता है कि इसके साथ ही साथ प्रदर लुकोरिया तथा स्त्रियों से सम्बंधित बीमारी भी थोड़े बहुत रूप में आपके जीवन में बराबर बनी रही होगी। क्यों यह बात सही है न ? महिला ने सिर झुकाते ही स्वीकृति में अपनी पलकें नीचे गिराईं। परन्तु अब आगे के जीवन में आपके स्वास्थ्य से सम्बन्धित कोई विशेष परे- शानी नहीं है। यद्यपि पेट से सम्बन्धित थोड़ी बहुत कठिनाइयां रह सकती हैं परन्तु वह परेशानी भी मोती पहनने से कुछ अनुकूल हो जायगी। आगे के समय में स्वास्थ्य की दृष्टि से आपके जीवन में अनुकूलता ही दिखाई देती है। यद्यपि जीवन के ५८वें वर्ष में फिर एक शाखा नीचे की ओर झुक रही है और उस शाखा ने मस्तिष्क रेखा से सम्बन्ध भी बनाया है, अतः उस अवधि में आप फिर बीमार पड़ेंगी और लगभग ३ या ४ महीने तक इस सम्बन्ध में कष्ट उठाना पड़ेगा। इसके अलावा आपके आगे के पूरे जीवन में किसी प्रकार की स्वास्थ्य से सम्बन्धित कोई बाधा या परेशानी नहीं है। आपकी प्रणय रेखा को भी साथ ही साथ अध्ययन कर लें। जैसा कि मैंने अभी आपको बताया कि आपके जीवन में लगभग ३१वें वर्ष में ही पति की तरफ से अनु- कूलता प्राप्त हुई होगी और यह बात भी सही है कि इस समय में आकर ही सामा- जिक दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से आपके पति की उन्नति हुई होगी। इसके बाद अर्थात् ३२वें वर्ष से आज तक आप आर्थिक तथा पति सुख की दृष्टि से पूर्ण अनुकूल स्थिति में ही रही हैं। और जब हम इस रेखा को आगे के जीवन में देखते हैं तो यह ज्ञात होता है कि आगे के समय में आपके पति आर्थिक तथा सामाजिक दृष्टि से बरा-