बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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पर उन्नति करते रहेंगे तथा आपको ज्यादा से ज्यादा पति-सुख मिलता रहेगा । आपके जीवन में इस दृष्टि से किसी प्रकार की कोई चिन्ता नहीं है । और यदि मैं सही शब्दों में कहूँ तो आगे के जीवन में यह रेखा जितनी स्पष्ट सरल और निर्दोष है उतनी अन्य कोई रेखा नहीं । अतः इसमें कोई दो राय नहीं कि आगे के पूरे जीवन में आपको पति की तरफ से पूर्ण सुख सम्मान और श्रेष्ठता मिलेगी । इस दृष्टि से आप एक सौभाग्यशाली महिला कही जा सकती हैं । अब मैं इसके साथ ही साथ सन्तान रेखा पर भी अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कर दूं । आपके हाथ में सही रूप में छः रेखाएं दिखाई दे रही हैं । इसमें चार रेखाएं मोटी हैं तथा दो रेखाएं पतली हैं । इससे यह भली भांति स्पष्ट हो जाता है कि आपके छः सन्तान होंगी, जिनमें चार पुत्र होंगे तथा दो पुत्रियां होंगी । परन्तु आप स्वयं देख सकती हैं कि आपकी प्रथम सन्तान रेखा बीच में से टूटी हुई है । अतः आपको अपनी प्रथम सन्तान का सुख प्राप्त नहीं होगा । और जैसा कि मैंने अभी कुछ समय पहले ही आपको स्पष्ट किया है कि आपकी प्रथम सन्तान का दुख आपको जीवन के ३८वें वर्ष में झेलना पड़ा होगा, और यह तथ्य इसी सन्तान से स्पष्ट होता है । इसके बाद गणना करने के बाद यह ज्ञात होता है कि आपके आगे के जीवन में ३ पुत्र तथा २ पुत्रियों का सुख बराबर मिलता रहेगा । परन्तु इसके साथ ही साथ मैं यह बता दूं कि सांसारिक दृष्टि से आपकी सन्तान से आपके सुख में किसी प्रकार की कोई न्यूनता नहीं है । परन्तु यदि आप यह विचार रखें कि ये पूर्णतः आपकी आज्ञा में रहेंगे या पूर्णतः आज्ञाकारी होंगे तो यह भ्रम आपको अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए । हां यह बात सही है कि आपका स्वभाव जरूरत से ज्यादा सहनशीलता का है और इसी वजह से इन सबसे निभ जायगी । यद्यपि कई बार इनसे मतभेद रहेंगे और इसकी वजह से भी आपको मान- सिक परेशानियां रहेंगी । आपके जीवन के ४४वें वर्ष में एक पुत्र तथा एक पुत्री का विवाह होगा । इसके बाद ४८वें वर्ष में एक और पुत्र के विवाह का योग है । इसके बाद ५४वें वर्ष में एक पुत्री का विवाह और ५७वें वर्ष में पुत्र का विवाह आपके हाथों से होगा । इसमें से भी दूसरे तथा तीसरे नम्बर के पुत्र से विशेष सुख मिलेगा । और इसी प्रकार सबसे छोटी पुत्री से आप मानसिक दृष्टि से ज्यादा सन्तुष्ट रह सकेंगी । यों आपके आगे के जीवन में सन्तान सुख है । सन्तान योग्य होगी और अपने कार्यों से वे अपने क्षेत्र में अनुकूलता भी प्राप्त करेंगी । अतः इस दृष्टि से आपके जीवन में किसी प्रकार की कोई न्यूनता नहीं है । गणना करने पर यह भी ज्ञात होता है कि ४७वें वर्ष के प्रारम्भ में आपको पौत्र-सुख तथा दोहित्र सुख मिलेगा । मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि आप ४७वें वर्ष