बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 340, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३३६ )
में दादी व नानी एक साथ एक ही वर्ष में बन सकेंगी। युवती का चेहरा दो क्षण के लिये प्रसन्नता से खिल उठा और फिर दूसरे ही क्षण लज्जा के मारे आंखें नीचे उतर गई । आपके हाथ में गुरु पर्वत अपने आप में श्रेष्ठ है, यद्यपि गुरु पर्वत का झुकाव शनि की ओर झुक रहा है परन्तु फिर भी गुरु पर्वत अपने आप में निर्दोष और स्पष्ट है। इससे ऐसा ज्ञात होता है कि आप अपने जीवन में सच्चरित्र और धार्मिक महिला रही हैं। भौतिक तथ्यों की अपेक्षा धार्मिक तथ्यों की ओर आपका झुकाव ज्यादा रहता है। आपके मन में यह इच्छा भी बराबर बनी रहती है कि आप अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा धार्मिक कार्य करें। गौ, ब्राह्मण तथा साधु सन्तों की सेवा करें तथा जीवन में तीर्थ यात्राएं करें। पर ऐसा योग आपके जीवन में ३६वें वर्ष के बाद से ही संभव है। और यह बात भी सही है कि आपके आगे के जीवन में बराबर धार्मिक भावना आपके मन में बनी रहेगी। यथा संभव आपके हाथों से दान तथा सत्कार्य भी होंगे। तीर्थ यात्राएं भी जीवन के ३६वें वर्ष के बाद से बराबर हैं और आगे के जीवन में बनी रहेंगी। इस दृष्टि से आपके जीवन में कोई कमी नहीं। यद्यपि शनि की ओर झुकाव होने के कारण इस क्षेत्र में ही बीच बीच में सांसारिक बाधाएं आती हैं। परन्तु फिर भी थोड़े बहुत रूप में ये कार्य आपके जीवन में बराबर बने रहेंगे। शनि पर्वत अपने स्थान पर सुदृढ़ है और मध्यमा उंगली भी पूरी लम्बाई लिये हुए है। अतः आप सौभाग्यशाली महिला होनी चाहिए। जब तक आप अपने पिता के घर में रहीं तब तक आपके पिता की बराबर उन्नति होती रही। और जब से आपने पति के घर में कदम रखा उसी दिन से निश्चय ही आपके पति की भी निरन्तर उन्नति बनी रही होगी। मुझे यह कहने में भी कोई संकोच नहीं है कि आगे के जीवन में यदि आपके पति आर्थिक सामाजिक अथवा अन्य क्षेत्रों में उन्नति करेंगे या श्रेष्ठता प्राप्त करेंगे तो उसके पीछे निश्चय ही आपके इस शनि पर्वत का सहयोग होगा। अतः जब तक पति आपसे सम्पर्क बनाये रहेंगे या परस्पर मधुर व्यवहार बना रहेगा तब तक उनकी उन्नति बराबर होती रहेगी। साथ ही आपको भी इस माध्यम से सम्मान प्राप्त होता रहेगा। आपके हाथ में सूर्य पर्वत भी बलवान है, परन्तु एक तो उसका झुकाव शनि पर्वत की ओर हो गया है दूसरे सूर्य रेखा कई रेखा से मिलकर बनी है। यद्यपि ये सहायक रेखाएं तो सूर्य रेखा को बल ही देती हैं परन्तु कुछ रेखाएं इस सूर्य रेखा को काटती भी हैं। इससे यह भली-भांति स्पष्ट होता है कि आप अपने जीवन में चाहे कितना ही कार्य करें परन्तु यश कम ही मिलेगा। मैं सही शब्दों में कहूं तो न तो आपको अपने पिता के घर में ही यश मिला होगा और न आपको अपने ससुराल में