भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 346

( ३४५ ) आपकी बात लगभग सही दिखाई देती है। क्योंकि मेरी मां ने मेरा जन्म लगभग शाम को ७ से १० के बीच बताया है। मेरे पंडित जी ने जो मेरी जन्म कुण्डली बनाई थी उसमें कर्क लग्न है। परन्तु कर्क लग्न लगभग ८ अंशों में उन्होंने स्पष्ट किया है। परन्तु ऐसा ज्ञात होता है कि उनको पूर्णतः जन्म समय का ध्यान नहीं रहा होगा। आपने जो पिछली घटनाएं स्पष्ट की हैं वे पूर्णतः सत्य हैं और उसके आधार पर मेरी राय में आपने जो समय बताया है वही सत्य है और प्रामाणिक होना चाहिए। पंडितजी ने धीरे से उत्तर दिया यह पूर्णतः प्रामाणिक ही समझिये । मैंने जो जन्म समय आपको बताया है वही सत्य है। क्योंकि इसी समय को आधार बनाकर यदि जन्म कुण्डली के ग्रहों का निर्धारण किया जाय तो आपके हाथ की रेखाओं तथा जन्म कुण्डली का पूर्णतः सामंजस्य हो जाता है। और इस प्रकार आपके हाथ की रेखाओं से जो घटनाएं स्पष्ट होती हैं वे ही घटनाएं जन्म कुण्डली से स्पष्ट हो जाती हैं। कुछ क्षण रुककर पंडित जी ने बताया कि मैं १ सेकेण्ड में आपके जन्म- कालीन ग्रहों को भी स्पष्ट कर देता हूं। आपकी जन्म कुण्डली में कर्क लग्न होना चाहिए तथा सिंह राशि में सिंह गुरु, चन्द्र, मंगल तथा केतु चार ग्रहों का संगम होना चाहिए। इसी प्रकार मकर में शनि कुम्भ में राहु तथा मीन राशि में सूर्य बुध और शुक्र तीन ग्रह एक साथ बैठे हुए होना चाहिए। हकीकत में देखा जाय तो आप की जन्म कुण्डली यही बनती है। महिला ने अपने बैग में पड़ी हुई जन्म कुण्डली निकाली और मिलान करने पर देखा गया कि वास्तव में जन्म कुण्डली में ग्रहों की स्थिति लगभग वही थी जो पंडित जी ने बताई थी । पंडितजी ने हाथ की रेखाओं का अध्ययन समापन करते हुए कुछ तथ्य और बताये जो कि इस प्रकार से थे— १. आपके हाथ में आकस्मिक धन रेखा का योग नहीं है। न तो अभी तक आपको आकस्मिक धन प्राप्त हुआ है और न आगे के जीवन में ऐसा कोई योग ही है। २. वाहन सुख जीवन के २४ वर्ष के प्रारम्भ में होगा। यह कार योग होगा और आगे के जीवन में यह वाहन सुख बराबर बना रहेगा। ३. आर्थिक दृष्टि से आपके आगे के जीवन में किसी प्रकार की कोई बाधा या परेशानी नहीं है। ४. आपके हाथ में कनिष्ठिका अनामिका तथा मध्यमा पर शंख है और तर्जनी पर पर्वत चिह्न है। अतः आपके जीवन का उत्तरार्द्ध निश्चय ही ज्यादा अनुकूल एवं सुखमय है।