बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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५. आपके हाथ में लक्ष्मी योग, ब्रह्म योग, साधु योग, महालक्ष्मी योग, कला- कार योग पतिव्रता योग, कैलाश योग तथा कमल योग स्पष्ट दिखाई देते हैं और इन योगों के बारे में मैं व्यावहारिक हस्तरेखा ज्ञान पुस्तक में विवरण दे चुका हूँ आप इससे सम्बन्धित तथ्य वहां देख सकते हैं । ६. आगे का पूरा जीवन आध्यात्मिक दृष्टि से अनुकूल एवं सुखदायक रहेगा मृत्यु हार्ट अटैक से अपने परिवार में अपने ही घर में होगी तथा पति से पहले होगी जो कि भारतीय नारी आदर्श के अनुरूप ही है । महिला पंडितजी के ज्ञान से पूर्णतः प्रभावित हो चुकी थी । उसने उठकर चरण छूते हुए कहा—वस्तुतः आपने जो मेरे हाथ का विवेचन किया है वह अपने आप में पूर्णतः सत्य एवं प्रामाणिक है । हस्तरेखा पर आपका ज्ञान अपने आप में अद्भुत है । मैं आपको तथा आपके ज्ञान को पूर्ण श्रद्धा की दृष्टि से देखती हूँ । पंडित जी ने उत्तर दिया इसमें मेरा कोई विशेष महत्व नहीं है । हमें विनीत और श्रद्धायुक्त होना चाहिए हमारे साहित्य पर, हस्तरेखा ज्ञान पर, हमारे पूर्वज ऋषियों पर जिन्होंने यह हमें ज्ञान दिया । मैं तो एक निमित्त मात्र हूं । उनके द्वारा दिये हुए ज्ञान का दीपक जलाऊं और उसके प्रकाश में ज्यादा से ज्यादा लोग अपना रास्ता ढूंढ़ सकें । अपने जीवन को अनुकूल और व्यवस्थित कर सकें, जीवन मे सभी दृष्टियों से पूर्णता पा सकें । इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही मैंने भारतीय ज्योतिष अध्ययन अनु- संधान केन्द्र, हाई-कोर्ट कालोनी जोधपुर, राजस्थान की स्थापना की है और इसमें श्रेष्ठ पंडितों को लगाया है जिससे कि भारत और भारत के बाहर के व्यक्ति जन्म-पत्रिका और हस्तरेखा के माध्यम से पथ-प्रदर्शन प्राप्त कर सकें । मुझे अत्यन्त प्रसन्नता है कि इस थोड़े से समय में ही केन्द्र ने अत्यधिक ख्याति और सम्मान अर्जित किया है। आज वहां भारत और भारत से बाहर विश्व के अन्य देशों से भी सैकड़ों हजारों हस्तरेखाओं के चित्र तथा जन्म कुण्डलियां प्राप्त होती हैं । सभी को इस सम्बन्ध में सन्तुष्ट किया जाता है और सभी लोगों से प्रशंसा प्राप्त हुई है । मुझे विश्वास है कि यह केन्द्र निश्चय, ही ज्योतिष के क्षेत्र में भारत का प्रति- निधित्व कर सकेगा ।