भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ३६ ) है और सफेद धब्बा व्यापार में लाभ का सूचक होता है । मध्यमा उंगली के नाखून पर यदि सफेद धब्बा दिखाई दे तो शीघ्र ही यात्रा होने का योग बनता है, जबकि काला धब्बा परिवार के किसी वृद्ध व्यक्ति की मृत्यु का संकेत करता है। इसी प्रकार अनामिका के नाखून पर यदि काला धब्बा दिखाई दे जाए तो शीघ्र ही समाज में अपयश मिलता है। इसके विपरीत यदि सफेद धब्बा दिखाई देता है तो उस व्यक्ति को शीघ्र ही सम्मान, धन तथा यश मिलने का योग बनता है । कनिष्ठिका उंगली के नाखून पर सफेद धब्बा अपने लक्ष्य में सफलता का सूचक माना गया है, जबकि काला धब्बा असफलता का द्योतक होता है । किसी भी उंगली पर या सभी उंगलियों पर यदि पीले धब्बे दिखाई देने लगें तो यह निश्चित रूप से समझ लेना चाहिए कि इस व्यक्ति की मृत्यु निकट भविष्य में ही होने वाली है। कभी-कभी लाल छींटे भी दिखाई दे जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये भी अशुभ संकेत ही करते हैं और, यदि किसी भी उंगली पर या सभी उंगलियों पर लाल छींटे या लाल धब्बे दिखाई दे जाएं तो उस व्यक्ति की हत्या होने का संकेत समझ में आता है । वस्तुतः नाखून और नाखूनों पर पाये जाने वाले चिह्न अपनेआप में बहुत अधिक महत्त्व रखते हैं। इसलिए हस्तरेखा विशेषज्ञ को चाहिए कि वह जब भी हाथ का अध्ययन करे तब उसे इन सारे तथ्यों को भी अपने दिमाग में स्थिर कर लेना चाहिए । गांठें बिना गांठों के उंगलियां नहीं बनती हैं परन्तु कुछ लोगों के हाथों में ये गांठें बहुत अधिक फूली हुई होती हैं। वास्तव में फूले हुए भाग को ही गांठ कहते हैं। यहां गांठ से मेरा तात्पर्य यह है कि प्रत्येक पर्व में जोड़ होता है जोकि स्पष्ट रूप से दिखाई देता है परन्तु नरम उंगलियों में ये गांठें न तो अनुभव होती हैं और न ही दिखाई देती हैं। प्रत्येक उंगली के तीन भाग होते हैं जोकि दो जोड़ों से बने हुए होते हैं। ये दोनों जोड़ दो गांठों के सूचक होते हैं। कुछ लोगों के हाथों में एक गांठ दिखाई देती है जबकि दूसरी नहीं भी दिखाई देती। कुछ लोगों के हाथों में दोनों ही गांठें स्पष्ट अनुभव होती हैं और कुछ लोगों के हाथों में एक भी गांठ अनुभव नहीं होती । सामान्य रूप से गांठें विचार, कार्य तथा प्रेरणा की सूचक होती हैं। मैं आगे इससे संबंधित कुछ तथ्य स्पष्ट कर रहा हूं :—