भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ३७ ) १. यदि तर्जनी उंगली में मात्र नीचे की ही गांठ हो तो ऐसे व्यक्ति मन्द बुद्धि के होते हैं, परन्तु यदि ऊपर वाली गांठ ही अनुभव होती है तो वे अपने कार्यों में चतुर एवं योग्य होते हैं। यदि तर्जनी उंगली में दोनों ही गांठें दिखाई दें तो ऐसे व्यक्ति आलसी और जीवन में निष्क्रिय बने रहते हैं। इसके विपरीत यदि तर्जनी उंगली में एक भी गांठ न हो तो ऐसे व्यक्ति चतुर, मेधावी, दूरदर्शी तथा अपने लक्ष्य में सफलता प्राप्त करने वाला होता है। २. यदि मध्यमा उंगली के नीचे वाले भाग में ही गांठ हो तो व्यक्ति अपने कार्य में बार-बार असफल होता है। इसके विपरीत यदि केवल ऊपर वाली गांठ ही हो तो व्यक्ति दृढ़निश्चयी होता है और असफलता मिलने पर भी हताश या निराश नहीं होता। यदि मध्यमा उंगली में दोनों ही गांठें दिखाई देती हों तो यह समझ लेना चाहिए कि यह व्यक्ति व्यापार में जितनी तेजी से प्रगति करेगा उतनी ही तेजी से इसका पतन भी हो जाएगा। यदि मध्यमा उंगली में कोई गांठ न हो तो वह व्यक्ति धीर, गम्भीर तथा अत्यन्त उच्चस्तरीय विद्वान अथवा व्यापारी होता है और सैकड़ों लोगों का भरण-पोषण करने में समर्थ होता है। ३. अनामिका उंगली में यदि मात्र नीचे ही गांठ अनुभव हो तो व्यक्ति धर्म के मामले में कमजोर होता है। धार्मिक कार्यों में उसकी रुचि कम होती है। परन्तु यदि केवल ऊपरी भाग में ही गांठ दिखाई दे तो ऐसा व्यक्ति धर्मभीरु तथा कमजोर दिल वाला होता है। यदि अनामिका उंगली में दोनों ही गांठें प्रतीत होती हों तो ऐसा व्यक्ति समाजद्रोही एवं धर्मद्रोही होता है। उसके जीवन में धर्म का या सामा- जिक कार्यों का कोई महत्त्व नहीं होता। वह व्यक्ति पूर्णतः स्वार्थी तथा अपने ही हित चिन्तन में लगा रहता है। इसके विपरीत यदि अनामिका उंगली में कोई गांठ न हो तो ऐसे व्यक्ति समाज का नेतृत्व करने में समक्ष होते हैं तथा समाज को इनकी देन स्पष्ट दिखाई देती है। इनके कार्यों में एक निश्चित उद्देश्य होता है। ये व्यक्ति अपने स्वार्थ की अपेक्षा ये दूसरों की भलाई का विशेष ध्यान रखते हैं, ऐसे ही व्यक्ति समाज को सही निर्देश दे सकते हैं। ४. यदि कनिष्ठिका उंगली में नीचे की ओर ही गांठ हो तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा चालाक एवं सावधान होता है। कानून तोड़ना इसके लिए बायें हाथ का खेल होता है तथा यह समाज विरोधी कार्यों में अग्रणी रहता है। यदि कनि- ष्ठिका उंगली के ऊपरी भाग में ही गांठ हो तो ऐसा व्यक्ति समाज के लिए सहायक होता है तथा उसके जीवन का अधिकतर हिस्सा सामाजिक कार्यों में लगता है। यदि कनिष्ठिका उंगली में दो गांठें हों तो निश्चय ही वह व्यक्ति तटस्थ नहीं रह पाता। ऐसा व्यक्ति स्वार्थी होने के साथ-साथ गलत कार्यों में भी लगा रहता है। समाज से इस व्यक्ति को बहुत अधिक आशाएं नहीं रखनी चाहिए। यदि कनिष्ठिका