बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
DevanagariHindipublished350 पृष्ठ
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( ५६ ) होते हैं तथा अपने कर्तव्यों के प्रति ये लगभग उदासीन-से रहते हैं। इसके विपरीत यदि अंगूठे में कोई गांठ अनुभव न हो तो ऐसे व्यक्ति दृढ़निश्चयी तथा अपने कार्य के प्रति अटूट आस्था रखने वाले होते हैं। एक बार जो मन में निश्चय कर लेते हैं, उस कार्य को पूरा करके ही छोड़ते हैं। इनके जीवन में दृढ़ता, प्रबल इच्छा-शक्ति और कार्य करने के प्रति अटूट आस्था होती है। ऐसे ही व्यक्ति अपने जीवन में सफल होकर देश और समाज को नया नेतृत्व देने में सक्षम हो सकते हैं।