बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४६ ) १. तर्जनी : २. मध्यमा : ३. अनामिका : ४. कनिष्ठिका : इन चारों उंगलियों में से प्रत्येक उंगली तीन-तीन खण्डों में बंटी हुई होती है । नैसर्गिक रूप से देखा जाये तो मध्यमा उंगली सबसे बड़ी; तर्जनी, मध्यमा के आखिरी खण्ड के मध्य तक पहुंचने वाली, अनामिका भी लगभग इतनी ही लम्बी, तथा कनिष्ठिका, अनामिका के आखिरी खण्ड तक पहुंचने वाली होती है, इसमें थोड़ी बहुत लम्बाई कम या ज्यादा हो सकती है । तर्जनी पहली उंगली है, जो कि अंगूठे के पास वाली होती है । इसके मूल में गुरु पर्वत का स्थान है । तर्जनी के पास मध्यमा होती है, जिसके मूल में शनि का पर्वत कहा जाता है । मध्यमा के पास वाली उंगली अनामिका कहलाती है, जिसके मूल में सूर्य पर्वत स्थित है तथा इसके पास की उंगली कनिष्ठिका होती है, जिसके मूल में बुध पर्वत का स्थान है, यह सभी उंगलियों से छोटी होती है । तर्जनी उंगली : इसको अंग्रेजी में 'इण्डैक्स फिंगर' कहत हैं । अधिकतर लोगों के हाथ में यह उंगली अनामिका से छोटी होती है । पर कुछ हाथों में मैंने यह उंगली अनामिका से बड़ी भी देखी है । जिस हाथ में यह उंगली अनामिका से लम्बाई में बड़ी हो वे व्यक्ति अपने गौरव से अभिभूत, घमण्डी तथा उत्तरदायित्वपूर्ण पदों पर कार्य करने वाले होते हैं । धार्मिक कार्यों में इनकी रुचि नहीं होती । ये ऊपर के अधिकारियों की चापलूसी करने में भी विश्वास रखते हैं । अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर कड़ाई से नियन्त्रण करते हैं । तथा शासन करने की भावना इनमें हद से ज्यादा होती है । यद्यपि इस वजह से समाज में इन्हें कई बार निन्दा का पात्र बनना पड़ता है फिर भी अपने धैर्य के बल पर ये आगे की ओर बढ़ते रहते हैं । यदि तर्जनी अनामिका उंगली से छोटी हो तो ऐसा व्यक्ति चालाक होता है ऐसा व्यक्ति किसी भी तरीके से अपना काम निकालने में माहिर होते हैं । ऐसे व्यक्तियों को स्वार्थी, खुदगर्ज और चालाक समझना चाहिए ।