बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
DevanagariHindipublished350 पृष्ठ
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( ५५ ) जिसकी उंगलियां एक सीध में होती हैं, वह व्यक्ति भाग्यशाली होता है तथा समाज में उसको विशेष सम्मान मिलता है। ६७ यदि सभी उंगलियां गठीली एवं उबड़-खाबड़ हों तो व्यक्ति विचारशील एवं अध्ययन प्रिय होता है। यदि उंगलियों में गांठें बहुत ज्यादा विकसित हों तो ऐसा व्यक्ति प्रतिभावान तथा चिन्तक होता है। उसके प्रत्येक कार्य में एक विशेष सुघड़ता और व्यवस्था होती है। यदि ये गांठें अत्यधिक उभरी हुई होती हैं तो ऐसे व्यक्ति जीवन में निराशा- वादी होते हैं तथा अकाल मृत्यु को प्राप्त होते हैं। यदि ये गांठें चिकनी होती हैं तो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भावुक देखे गये हैं। यदि गांठें रहित उंगलियां हों तो व्यक्ति दार्शनिक होता है।