बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५७ ) ६. तारा :—जिन व्यक्तियों की उंगलियों पर तारा या क्रॉस का चिह्न दिखाई दे तो वह व्यक्ति प्रबल भाग्यवादी एवं भाग्यशाली होगा, ऐसा समझ लेना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को जीवन में कई बार अप्रत्याशित रूप से धन-लाभ होता है। आर्थिक दृष्टि से ये व्यक्ति जीवन में सुखी रहते हैं। ७. कंदुक :—यदि उंगलियों के पोरुओं पर गोल निशान या कंदुक चिह्न दिखाई दे तो वे व्यक्ति आदर्श प्रेमी और आदर्श मित्र कहे जाते हैं। एक तरफ जहां इनकी रुचि भोग की तरफ होती है वहीं दूसरी ओर वैराग्य की तरफ भी इनका झुकाव होता है। मानसिक दृष्टि से ये अस्थिर होते हैं तथा किसी भी कार्य को पूर्णता के साथ सम्पन्न करना इनके स्वभाव में नहीं होता। ८. जाल :—जाल युक्त उंगलियां इस बात की सूचक होती हैं कि व्यक्ति के जीवन में जरूरत से ज्यादा बाधाएं एवं परेशानियां आयेंगी। यद्यपि इनकी जीवन शक्ति दृढ़ होती है तथा अपनी इच्छा-शक्ति के बल पर ये संकटों से भी सही सलामत निकल आते हैं परन्तु फिर भी इनके जीवन में आराम तथा सुख कम ही रहता है। अधिकतर अपराधवृत्ति के लोगों तथा डाकुओं की उंगलियों पर ऐसे चिह्न आसानी से देखे जा सकते हैं। ६. चतुर्भुज :—यदि उंगली के पोरुए पर वर्ग या चतुर्भुज का चिह्न दिखाई दे तो यह समझ लेना चाहिए कि वह व्यक्ति अपने जीवन में परिश्रमी रहा है और अपने परिश्रम तथा उद्यम के बल पर लक्ष्मी को अपने वश में रखने की सामर्थ्य रखता है। ऐसा व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से पूर्ण सम्पन्न तथा सुखी रहता है। यदि किसी की उंगलियों पर एक से अधिक चिह्न दिखाई दें तो उस व्यक्ति में उनसे सम्बन्धित फलादेशों का मिश्रण समझना चाहिए। अंगूठा अंगूठे से भी व्यक्ति के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलता है। इसके बारे में भी मैं संक्षेप में यहां प्रकाश डाल रहा हूं : १. लम्बा अंगूठा :—ऐसे व्यक्ति स्वेच्छाचारी, आत्मनिर्भर तथा दूसरों पर अपना अधिकार रखने वाले होते हैं। इनके जीवन में भावना की बजाय बुद्धि ज्यादा होती है और एक प्रकार से इन्हें बुद्धिजीवी ही कहा जाता है। गणित इंजीनियरिंग आदि कार्यों में इनकी विशेष रुचि रहती है। २. छोटा अंगूठा :—ऐसा व्यक्ति अपनी बुद्धि से कम काम लेता है अपितु दूसरों से प्रभावित होकर कार्य करता है। इनके जीवन में बुद्धि की अपेक्षा भावना का बाहुल्य रहता है। काव्य, चित्रकला, संगीत आदि में ये विशेष रुचि लेते हैं।