भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ५८ ) [चित्र: अंगूठे के मुख्य तीन भाग — ऊर्ध्व भाग, मध्य भाग, अधोभाग — चित्र संख्या ४२] अंगूठे के मुख्य तीन भाग ३. कड़ा अंगूठा :-ऐसे व्यक्ति हठी और सतर्क होते हैं। कोई भी बात अपने पेट में पचा लेने की विशेष क्षमता रखते हैं। इनके जीवन में भावुकता का अभाव होता है तथा बुद्धि के बल पर ही ये विशेष रूप से संचालित रहते हैं। ४. लचीला अंगूठा :- जिस व्यक्ति के हाथ में ऐसा अंगूठा होता है, वह व्यक्ति धन-संग्रह करने में विशेष रुचि रखता है तथा परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको ढाल लेने की क्षमता रखता है। ५. पहला पर्व : - यदि अंगूठे का पहला पर्व बहुत अधिक लम्बा हो तो वह व्यक्ति निरंकुश होता है जबकि यह पर्व छोटा होने पर उसमें कार्य करने की इच्छा कम होती है। ऐसे व्यक्ति दुर्बल इच्छा-शक्ति वाले देखे गये हैं। यदि अंगूठे का अग्रभाग वर्गाकार हो तो व्यक्ति न्याय-कायों में चतुर होता है तथा अपनी न्याय- शीलता के कारण समाज में आदरणीय स्थान प्राप्त करता है । यदि अंगूठे का अग्र- भाग चौड़ा होता है तो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा हठी होता है और हठ के कारण ही जीवन में कई बार नुकसान उठा लेता है। यदि अंगूठे का पहला पर्व असाधारण रूप