बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७३ ) वस्तुतः हाथ में चन्द्र-पर्वत से ही व्यक्ति कल्पनाप्रिय, सौन्दर्यप्रिय तथा भावुक हो सकता है। ८. हर्षल : यदि वास्तव में देखा जाय तो यह ग्रह दूसरे ग्रहों की अपेक्षा ज्यादा बलवान एवं समर्थ होता है। हथेली में इसका क्षेत्र हृदय तथा मस्तिष्क रेखा के बीच में होता है। सही रूप में इसका क्षेत्र भली प्रकार से यह कनिष्ठिका के नीचे, बुध पर्वत से थोड़ा-सा नीचे अनुभव किया जा सकता है। इस ग्रह का प्रभाव हृदय तथा मस्तिष्क पर विशेष रूप से होता है। जिन व्यक्तियों की हथेली में यह पर्वत बुध के नीचे तथा हृदय एवं मस्तिष्क रेखा के बीच में होता है, वह व्यक्ति विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक और गणितज्ञ बनता है। अणु, परमाणु टेलीविजन आदि जटिल यन्त्रों के निर्माण तथा रचना में ऐसे व्यक्ति पूर्णतः सफल होते हैं। यदि इस पर्वत का उभार कम होता है तो ऐसे व्यक्ति मशीनरी से सम्बन्धित कार्यों में रुचि लेते हैं तथा ऐसे ही स्थानों पर नौकरी करके संतुष्ट होते हैं। यदि इस पर्वत पर त्रिकोण या चतुर्भुज का चिह्न हो तो वह व्यक्ति आश्चर्य- जनक रूप से प्रगति करता है तथा अपने कार्यों से विश्वस्तरीय सम्मान प्राप्त करता है। समाज में उसका सम्मान होता है और उसे अपने जीवन में आशा से अधिक सफलता मिलती है। यदि हर्षल पर्वत से कोई रेखा अनामिका उंगली की ओर जाती है तो वह व्यक्ति जीवन में विश्व प्रसिद्ध होता है। यदि हर्षल पर्वत का झुकाव बुध पर्वत की ओर विशेष रूप से होता है तो ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिभा का दुरुपयोग करता है और एक प्रकार से वह व्यक्ति अन्तर्राष्ट्रीय ठग या लुटेरा हो जाता है। ऐसे व्यक्ति हृदय रोग से भी बराबर पीड़ित रहते हैं। यदि हर्षल पर्वत नेप्च्यून की ओर झुकता हुआ दिखाई दे तो ऐसे व्यक्ति को पूर्णतः भोगी समझना चाहिए। ऐसा व्यक्ति एक पत्नी से सन्तुष्ट न होकर भटकता फिरता है। उसका गृहस्थ जीवन एक प्रकार से बरबाद हो जाता है तथा उसे अपनी पत्नी तथा अपने पुत्रों से किसी प्रकार का कोई मोह नहीं होता। जीवन में जरूरत से ज्यादा व्यसनों में लिप्त होकर यह अपना स्वास्थ्य एवं सौन्दर्य खो बैठता है। ९. नेप्च्यून : यह ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित होने के कारण इसका प्रभाव पृथ्वीवासियों पर बहुत कम पड़ता है परन्तु फिर भी इसका प्रभाव मानव जीवन पर जो भी पड़ता है, वह स्थायी होता है और अपने आप में आश्चर्यजनक परिणाम दिखाता है। हथेली में इस ग्रह का क्षेत्र मस्तक रेखा से नीचे तथा चन्द्र क्षेत्र से ऊपर होता है। यदि यह क्षेत्र अथवा यह पर्वत विशेष रूप से उभरा हुआ हो तो वह व्यक्ति श्रेष्ठ संगीतज्ञ, कवि अथवा लेखक होता है। यदि इस पर्वत पर रेखा दिखाई दे और यदि