बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 75, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( ७४ )
वह रेखा आगे चलकर भाग्य रेखा से मिल जाय तो वह व्यक्ति जीवन में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण पद पर पहुंचता है । यदि इस पर्वत का झुकाव चन्द्र क्षेत्र की तरफ विशेष हो तो उसका स्तर अपने आप में अत्यन्त घटिया होता है ऐसा व्यक्ति संकीर्ण मनोवृत्ति वाला तथा समाज विरोधी कार्य करने वाला होता है। यदि नेपच्यून पर्वत से उठकर कोई रेखा मस्तिष्क रेखा को काट लेती है तो वह व्यक्ति निश्चय ही पागल होता है तथा उसके जीवन का अधिकतर हिस्सा पागलखाने में ही व्यतीत होता है। यदि यह पर्वत जरूरत से ज्यादा उभरा हुआ हो तो ऐसे व्यक्ति का जीवन दुखमय होता है तथा उसका गृहस्थ जीवन बरबाद हो जाता है। ऐसे व्यक्ति सनकी, संशयालु तथा क्रूर प्रकृति के माने जाते हैं। यदि नेपच्यून पर्वत विकसित होकर हर्षल से मिल जाता है तो वह व्यक्ति जीवन मे निश्चय ही धन के लालच में किसी की हत्या करेगा, ऐसा समझ लेना चाहिए। ऐसे व्यक्ति अपने कार्यों के प्रति लापरवाह होते हैं, तथा कार्य हो जाने के बाद पछताते रहते हैं। यदि इस पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो उसका पूरा जीवन गरीबी तथा निर्धनता में बीतता है। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन की आवश्यकताओं को भी भली प्रकार से पूरा नहीं कर पाते । १०. प्लूटो : अंग्रेजी में इस ग्रह को प्लूटो तथा हिन्दी में इसे 'इन्द्र' के नाम से पुकारते हैं। हथेली में इसका क्षेत्र हृदय रेखा के नीचे तथा मस्तिष्क रेखा के ऊपर होता है, और यह हर्षल तथा गुरु क्षेत्र के बीच में अवस्थित होता है। प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में इस पर्वत को स्पष्टता से देखा जा सकता है। इसका प्रभाव व्यक्ति की वृद्धावस्था में ही देखने को मिलता है। यदि यह पर्वत भली प्रकार से विकसित होता है तो उस व्यक्ति का बुढ़ापा अपने आप में अत्यन्त सुखी एवं सफल रहता है। जीवन के ४२ वें वर्ष से आगे वह जीवन में सुख अनुभव करने लगता है और मृत्यूपर्यन्त वह सभी दृष्टियों से सुखी ही रहता है। यदि प्लूटो पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो उसकी मृत्यु ४५ वर्ष से पहले-पहले दुर्घटना से हो जाती है। यदि यह पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो तो वह व्यक्ति असभ्य, मूर्ख, निरक्षर तथा अपव्ययी होता है। इसको जीवन में पग-पग पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है तथा जीवन में परिवार वालों का तथा मित्रों का किसी भी प्रकार से कोई सहयोग नही मिलता। यदि यह पर्वत अविकसित हो तो वह व्यक्ति भाग्यहीन माना जाता है। उसका स्वभाव चिड़चिड़ा तथा दुखमय हो जाता है ।