बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७५ ) ११. राहु : हथेली में इस पर्वत की स्थिति मस्तिष्क रेखा से नीचे चन्द्र, मंगल, तथा शुक्र से घिरा हुआ जो भूभाग होता है वह राहु क्षेत्र कहलाता है । भाग्य रेखा इसी पर्वत पर से होकर शनि पर्वत की ओर जाती है । राहु का क्षेत्र यदि हथेली पर अत्यन्त पुष्ट एवं उन्नत हो तो ऐसा व्यक्ति निश्चय ही भाग्यवान होता है और यदि पुष्ट पर्वत पर से होकर भाग्य रेखा स्पष्ट तथा गहरी होकर आगे बढ़ती है तो वह व्यक्ति जीवन में परोपकारी प्रतिभावान धार्मिक तथा सभी प्रकार से सुख भोगने वाला होता है । यदि हथेली पर भाग्य रेखा टूटी हुई हो पर राहु पर्वत विकसित हो तो ऐसा व्यक्ति एक बार आर्थिक दृष्टि से बहुत अधिक ऊंचा उठ जाता है और फिर उसका पतन हो जाता है । यदि यह पर्वत अपने स्थान से हटकर हथेली के मध्य की ओर सरक जाता है तो उस व्यक्ति को यौवनकाल में बहुत अधिक बुरे दिन देखने को मिलते हैं । यदि हथेली के बीच का हिस्सा गहरा हो और उस पर से भाग्य रेखा टूटी हुई आगे बढ़ती हो तो वह व्यक्ति यौवनकाल में भिखारी के समान जीवन व्यतीत करता है । यदि राहु पर्वत कम उभरा हुआ हो तो ऐसा व्यक्ति चंचल स्वभाव का तथा अपने ही हाथों अपनी सम्पत्ति का नाश करने वाला होता है । १२. केतु : हथेली में इस पर्वत का स्थान मणिबन्ध के ऊपर शुक्र और चन्द्र क्षेत्रों को बांटता हुआ भाग्य रेखा के प्रारम्भिक स्थान के समीप होता है । इस ग्रह का फल राहु के समान ही देखा गया है । इस ग्रह का प्रभाव जीवन के पांचवें वर्ष से बीसवें वर्ष तक होता है । यदि यह पर्वत स्वाभाविक रूप से उन्नत एवं पुष्ट होता है तथा भाग्य रेखा भी स्पष्ट तथा गहरी हो तो वह व्यक्ति भाग्यशाली होता है तथा अपने जीवन में समस्त प्रकार के सुखों का भोग करता है । ऐसा बालक गरीब घर में जन्म लेकर भी अमीर होता देखा गया है । यदि यह पर्वत अस्वाभाविक रूप से उठा हुआ हो और भाग्य रेखा कमजोर हो तो उसे बचपन में बहुत अधिक बुरे दिन देखने पड़ते हैं । उसके घर की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है तथा शिक्षा के लिए भी ऐसे बालक को बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । ऐसा बालक बचपन में रोगी भी होता है । यदि यह पर्वत अविकसित हो और भाग्य रेखा प्रबल भी हो फिर भी उसके जीवन से दरिद्रता नहीं मिटती, अतः केतु पर्वत विकसित हो और साथ ही भाग्य रेखा भी स्पष्ट और विकसित हो तभी व्यक्ति जीवन में पूर्ण उन्नति कर सकता है । इस प्रकार हम देखते हैं कि व्यक्ति की हथेली में यदि पर्वत सही रूप से विक- सित एवं पुष्ट होते हैं तभी व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण उन्नति कर सकता है ।