बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपर्वत युग्म एवं हस्त चिह्न हथेली पर पर्वतों का अध्ययन हमने पीछे के अध्याय में किया है परन्तु ऐसा देखा जाता है कि अधिकतर हाथों में एक से अधिक पर्वत विकसित होते हैं । ऐसी स्थिति में उन दोनों पर्वतों का मिश्रित फल उसके जीवन में प्राप्त होता है । पाठकों के लिए यह फल प्राप्त करना कुछ कठिन-सा होता है इसलिए मैं उनकी सुविधा के लिए नीचे पर्वत-युग्मों का फल स्पष्ट कर रहा हूँ : १. गुरु : गुरु और शनि : उत्तम भाग्यवर्द्धक । गुरु और सूर्य : श्रेष्ठ धन सम्मान, पद-प्राप्ति । गुरु और बुध : ज्योतिष ज्ञान में रुचि तथा काव्य शास्त्र आदि में विशेष सफलता । गुरु और मंगल : पराक्रम, साहस, नीति-निपुणता तथा रण-संचालन योग्यता । गुरु और नेपच्यून : श्रेष्ठ विचार, उत्तम धन-प्राप्ति । गुरु और हर्षल : विज्ञान में रुचि, परोपकार की भावना । गुरु और प्लूटो : श्रेष्ठ वक्ता, उर्वर मस्तिष्क, विलक्षण प्रतिभा । गुरु और राहू : दुष्टविचार तथा आत्म-विश्वास में कमी । गुरु और केतु : जीवन में बाधाएं, परेशानियां एवं असफलताएं । गुरु और चन्द्र : गम्भीरता तथा प्रभावपूर्ण व्यक्तित्व । गुरु और शुक्र : आकर्षक व्यक्तित्व एवं सम्मोहन की विशेष योग्यता तथा मानव को पूर्ण प्रभावित करने की क्षमता । २. शनि : शनि और सूर्य : तर्क-शक्ति, चिन्तन तथा वैज्ञानिक भावना का विकास । शनि और बुध : निर्णय, लेने की क्षमता तथा परोपकार की भावना । शनि और शुक्र : स्वार्थी, रसिक तथा प्रेम में सब कुछ लुटाने वाला । शनि और राहू : उत्तम गुणों से युक्त एवं जीवन में आकस्मिक धन लाभ करने वाला ।