बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 78, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( ७७ ) शनि और केतु : आजीविका की चिन्ता एवं मानसिक परेशानियां । शनि और नेपच्यून : जीवन में कई बार विदेश यात्राएं । शनि और हर्षल : एकान्त-प्रिय तथा विविध कलाओं में निपुणता । शनि और प्लूटो : चतुराई, विवेकशीलता तथा तेजस्विता । शनि और चन्द्र : रहस्यमय एवं गोपनीय व्यक्तित्व । शनि और मंगल : लड़ाकू प्रवृत्ति तथा क्रोधित होने पर सब कुछ विध्वंस कर देने की प्रवृत्ति । ३. सूर्य : सूर्य और बुध : विज्ञान में रुचि तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने की क्षमता । सूर्य और शुक्र : योजना बद्ध रूप से कार्य करने वाला । सूर्य और राहू : जीवन में बराबर दुख, चिन्ता एवं परेशानियां भोगने वाला । सूर्य और केतु : विदेश यात्राएं । सूर्य और हर्षल : उच्चस्तरीय प्रसिद्धि एवं ज्ञान तथा विवेक का विकास । सूर्य और नेपच्यून : सोच समझकर योजना बनाने वाला । सूर्य और प्लूटो : धीर गम्भीर व्यक्तित्व । सूर्य और चन्द्र : आडम्बर तथा कृत्रिमता में विश्वास रखने वाला । सूर्य और मंगल : आत्मोत्सर्ग की प्रबल भावना । ४. बुध : बुध और शुक्र : विपरीत सैक्स के प्रति विशेष रुझान तथा संगीत के प्रति विशेष रुचि । बुध और राहू : गुस्सा तथा चिड़चिड़ा स्वभाव । बुध और केतु : यात्रा प्रेमी तथा मानवीय दृष्टि से सफल । बुध और हर्षल : कल्पना प्रिय । बुध और नेपच्यून : परोपकारी तथा विश्व की कल्याण कामना करने वाला । बुध और प्लूटो : अन्तर्राष्ट्रीय सफलता प्राप्त करने वाला व्यापारी । बुध और चन्द्र : वैज्ञानिक प्रतिभा सम्पन्न दूरदर्शी व्यक्तित्व । बुध और मंगल : तुरन्त एवं सही निर्णय लेने वाला व्यक्ति ।