बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७८ ) ५. शुक्र : शुक्र और चन्द्र : प्रेमभावना की तीव्रता तथा कला प्रेम । शुक्र और राहू : निम्न स्तर की स्त्रियों से सम्बन्ध । शुक्र और केतु : सहृदयता एवं उच्च भावना का विकास । शुक्र और हर्षल : प्रेम में तीव्रता । शुक्र और नेपच्यून : उच्च कोटि का कला प्रेम और मनुष्य मात्र के प्रति स्नेह । शुक्र और प्लूटो : जीवन की बाधाओं को समझने वाला और उन बाधाओं को परास्त करने वाला । शुक्र और मंगल : संगीत ज्ञान में पूर्णता । ६. चन्द्र : चन्द्र और मंगल : समुद्रपारीय यात्रा । चन्द्र और राहू : मित्रों द्वारा विश्वासघात । चन्द्र और केतु : यौवनावस्था में प्रेम के द्वारा बदनामी । चन्द्र और हर्षल : मानवीय भावनाओं का विकास । चन्द्र और नेपच्यून : वैरागी भावना । चन्द्र और प्लूटो : प्रबल काम-शक्ति । ७. राहू : राहू और केतु : आजीविका के लिए कठोर प्रयत्न । राहू और हर्षल : दुखमय जीवन । राहू और नेपच्यून : विदेश में रहने वाली स्त्री से विवाह । राहू और प्लूटो : अपराधवृत्ति का विकास । ८. केतु : केतु और हर्षल : अत्याचार की भावना । केतु और नेपच्यून : ज्ञान शून्यता । केतु और प्लूटो : सम्मान वृद्धि । ६. हर्षल : हर्षल और प्लूटो : वैज्ञानिक प्रतिभा का विकास ।