भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ७६ ) हर्षल और नेपच्यून : विदेश गमन, उच्च पद प्राप्ति । १०. नेपच्यून : नेपच्यून और प्लूटो : तीव्र कामांधता । हथेली पर पाये जाने वाले चिह्न : हथेली का अध्ययन करते समय उन पर अंकित चिह्नों का भी सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए क्योंकि भविष्यफल और फलादेश में ये चिह्न बहुत अधिक सहयोग देते हैं । हथेली पर जो चिह्न पाये जाते हैं उनमें से मुख्य निम्न प्रकार से हैं : १—रेखा २ – अधिक रेखाएं ३—आपस में कटती हुई रेखाएं ४—बिन्दु ५—क्रॉस ६—नक्षत्र ७—वर्ग ८—वृत्त ६—त्रिकोण १०—जाली अब मैं पर्वतों पर पाये जाने वाले इन चिह्नों का शुभाशुभ फल स्पष्ट कर रहा हूं : १. गुरु पर्वत : एक रेखा : कार्यों में सफलता । एक से अधिक रेखाएं : भाग्योदय तथा नवीन कार्यों में रुचि । आपस में कटती हुई रेखाएं : निम्न कोटि के विचार तथा जीवन में परेशानियां । बिन्दु : सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी । क्रॉस : वैवाहिक जीवन में पूर्णता तथा घर में मांगलिक कार्य । नक्षत्र : ऊंची इच्छाएं तथा उन इच्छाओं की पूर्ति । वर्ग : कल्पना और यथार्थता का सुखद समन्वय ।