बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८१ ) कई रेखाएं : कलात्मक रुचि तथा उच्च पद प्राप्ति । आपस में कटती हुई रेखाएं : नौकरी में बाधाएं । बिन्दु : अपमान एवं पराजय । क्रॉस : प्रसिद्धि में न्यूनता । नक्षत्र : धन, उच्च पद प्राप्ति । वर्ग : समाज में विशेष सम्मान । वृत्त : जीवन में कई बार विदेश यात्रा । त्रिकोण : कला के क्षेत्र में उच्च सम्मान । जाली : मान हानि । सूर्य का चिह्न : कला के माध्यम से विश्व प्रसिद्ध सम्मान तथा श्रेष्ठ धन लाभ । शनि का चिह्न : तंत्र विद्याओं में रुचि । गुरु का चिह्न : सफल राजनीतिज्ञ । बुध का चिह्न : वाक्पटु । शुक्र का चिह्न : कविता तथा कला के प्रति विशेष रुझान । चन्द्र का चिह्न : साहित्यिक कार्यों में सफलता । मंगल का चिह्न : प्रसिद्ध सैनिक अथवा सेनाध्यक्ष । ४. बुध पर्वत : एक रेखा : धनवान तथा समृद्धि। कई रेखाएं : व्यापार में असाधारण योग्यता । आपस में कटती हुई रेखाएं : सफल चिकित्सक । बिन्दु : व्यापार में असाधारण हानि । क्रॉस : दिवालिया । नक्षत्र : विदेशों में व्यापार करने वाला । वर्ग : भविष्य को पहचानने वाला । वृत्त : एक्सीडेंट तथा आकस्मिक मृत्यु । त्रिकोण : राजनीतिक सफलता । जाली : मान हानि । धब्बा : व्यापार में असफलता । बुध का चिह्न : सफल व्यापारी ।