बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८२ ) गुरु का चिन्ह : विज्ञान में असाधारण योग्यता । शनि का चिन्ह : जीवन में हर क्षेत्र में निराशा । सूर्य का चिन्ह : धार्मिक भावना का विकास एवं ज्योतिष शास्त्र में निपुणता । शुक्र का चिन्ह : धन के लालच में निन्दनीय प्रेम । चन्द्र का चिन्ह : षडयन्त्र तथा धोखा देने की प्रवृत्ति । मंगल का चिन्ह : ठगविद्या में सफलता । ५. शुक्र पर्वत : एक रेखा : तीव्र कामवासना । कई रेखाएं : अत्यधिक भोगी । आपस में कटती हुई रेखाएं : प्रेम में असफलता तथा सम्मान हानि । बिन्दु : गुप्तांगों की बीमारी । क्रॉस : असफल प्रेम तथा जीवन में निराशावादी भावना का विकास । नक्षत्र : प्रेमिका के कारण धन हानि । वर्ग : जेल यात्रा । वृत्त : दुर्घटना में शारीरिक क्षति । त्रिकोण : जीवन में कई स्त्रियों से भोग करने वाला । जाली : अस्वस्थ शरीर । शुक्र का चिन्ह : विशेष भोगी । गुरु का चिन्ह : चापलूसी करने वाला । शनि का चिन्ह : ईर्ष्या एवं अन्याय पूर्ण प्रेम भावना । सूर्य का चिन्ह : आदर्श प्रेम बुध का चिन्ह : धन के लिए प्रेम । चन्द्र का चिन्ह : वासना पूर्ण विचार । मंगल का चिन्ह : जीवन में कई बार कई स्त्रियों से बलात्कार । ६. मंगल पर्वत : एक रेखा : साहस । कई रेखाएं : हिंसात्मक प्रवृत्ति ।