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बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

( ३४८ ) - अवसर को आते ही पहिचान लें । और उसको अपनी मुट्ठी में बन्द कर लें । प्रत्येक काल, के क्षणांश के धड़कन को आप अनुभव करें और अपने अनुकूल बनाने की कोशिश करें । ये आपके हाथ में है और यदि आपने इस प्रकार से किया तो आप देखेंगे कि आपके हाथ की रेखाएं बदल रही हैं । आपके हाथ की रेखाएं ऊपर की ओर उठ रही हैं । आपके कदम उन्नति की तरफ अग्रसर हो रहे हैं । सफलता, प्रसिद्धि और सम्मान सामने जयमाला लिये हुए खड़ा है । आवश्यकता है आपके कदम बढ़ाने की जयमालाएं वरण करने की वे आपकी प्रतीक्षा कर रही हैं । व्यग्रता के साथ इन्त- जार कर रही है । जीवन के प्रत्येक कार्य के दो पहलू हैं; सकारात्मक और नकारात्मक । हम किसी भी कार्य को इन दो रूपों में ही देख सकते हैं । या यों कहा जाय कि हम निर्माण और ध्वंस के बीच में खड़े हैं । यह आप पर निर्भर है कि आप अपने जीवन की घड़ियों का सृजन करते हैं या ध्वंस करते हैं । हकीकत में देखा जाय तो आप जड़ नहीं हैं चेतन हैं । गतिशील हैं सक्रिय हैं । और सक्रियता का तात्पर्य यह है कि आप गतिशील रहें और हर क्षण अपने आपको गतिशील बनाये रखें । निरन्तर आपके पग उन्नति की तरफ अग्रसर होते रहें । आप उठें, सक्रिय बनें, सृजन करें । आप निश्चिन्त रहें कि यह आपके चारों तरफ अभाव और निराशा की जो खाई है वह अपने आप ही मिट जायेगी । ये रास्ते में जो कांटे पड़े हैं वे अपने आप फूलों में परिवर्तित हो जायेंग । पर इसके लिये आत्म-विश्वास की जरूरत है । हिम्मत साहस और धैर्य की आवश्यकता है । निरन्तर आगे बढ़ने की इच्छा-शक्ति की आवश्यकता है । आपके पास समय, शक्ति, श्रम, स्वास्थ्य और जीवन है। आप दोनों हाथों से इनका उपयोग कीजिये । आपको जितना श्रम और समय मिला है उतना ही समय गांधी को, लिंकन को, टैगोर को, ईशा को या टॉलस्टाय को भी मिला था । फिर क्या कारण है कि वे इस संसार के आकाश में आज भी चमक रहे हैं और आप गुम- नाम से अंधेरे में भटक रहे हैं। फिर क्या कारण है कि आप पीछे हैं, फिर क्या बात है कि आपके कदम लड़खड़ा रहे हैं। उठिये, आगे बढ़िए, सफलता की मंजिल सामने ही है, विजय श्री आपको पुकार रही है, प्रसिद्धि और सम्मान आपके स्वागत के लिए खड़े हैं और सफलता जयमाला लिए आपको वरण करने के लिए तैयार है। हृदय में जोश और स्नायुओं में साहस भरकर आगे बढ़िये । आपका प्रत्येक के कदम मजबूत हो, इस धुंधलके में भी आपकी दृष्टि आर-पार देख सके। आपके हाथ में है कि आप अपनी दुर्बल रेखाओं को बदल दें । अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिणित कर दें । काम करने का यही समय है । इसी क्षण से समय है और सही रूप में आपके जीवन के समय की यही पुकार है ।

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