भारतकोश
याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary

महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished782 पृष्ठ

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( ४५ ) उच्च जाति की कन्या का अपहरण ३७९ राजा का कोश चुराने वाले का दण्ड ३८८ कन्या की सहमति, असहमति का शव के ऊपर की वस्तु बेचने वाले विचार ३८० का दण्ड ३८९ कन्यादूषण का दण्ड ,, पिता या आचार्य को पीटने वाले कन्या का वास्तविक दोष का दण्ड ,, कहने का दण्ड ३८१ राजसिंहासन पर बैठने का दण्ड ,, पशुमैथुन, हीनस्त्रीसंभोग, गो- आँख फोड़ने, राजा के अनिष्ट का मैथुन का दण्ड ,, प्रचार करने, ब्राह्मण का वेश साधारण स्त्रीगमन का दण्ड ,, बनाने पर दण्ड ,, वेश्या जाति की प्राचीनता ६८२ राग, लोभ से व्यवहार में पक्षपात पञ्चचूडा नाम की अप्सराएं ,, करने पर दण्ड ,, दासी-संभोग का दण्ड ,, साक्षियों का दोष होने पर दण्ड ३९० स्वैरिणी दासियों के बलात् सभासदों द्वारा देखे गये अधर्मपूर्ण संभोग का दण्ड ३८३ व्यवहार पर विचार ,, वेतन लेने वाली वेश्या के मुकरने निर्णीत व्यवहार के प्रत्यावर्तन का पर दण्ड ,, दण्ड ,, असामान्य स्त्रीमैथुन का दण्ड ३८४ पराजय न स्वीकारने वाले का दण्ड ,, चाण्डाली-संभोग का दण्ड ,, राजा द्वारा अन्याय से लिये गये धन की उपयोगविधि ३९१ ( २५ ) प्रकीर्णकप्रकरण ३. प्रायश्चित्ताध्यायः स्त्रीपुंयोग नाम का व्यवहार ३८४ (१) आशौचप्रकरण । उसका लक्षण ३८५ आशौच शब्द का अर्थ ३९२ स्त्री पुरुष को अपने मार्ग में शव के गाड़ने और जलाने का विचार ,, स्थापित करना ,, शवानुगमन ,, प्रकीर्ण व्यवहार का लक्षण ,, चाण्डाल आदि अग्नि का निषेध ३९३ अपराध विशेष का दण्ड ,, उदकदान के विचार ३९४ द्विज को अभक्ष्य से दूषित आहिताग्नि की मृत्यु पर विशेष करने का दण्ड ,, नियम ,, खोटा सोना और निषिद्ध मांस शूद्र द्वारा लाये गये अग्नि आदि ३९५ बेचने का दण्ड ३८६ ब्रह्मचारी और पतित द्वारा उदक- सावधान करने पर चोट लगने दान का निषेध ३९६ में दोषाभाव ३८७ सपिण्डों में उदकदान के लिए दुर्घटना से हिंसा होने में प्रतिषिद्ध व्यक्ति ,, दोषाभाव ,, पाखण्डी आदि के मरनेपर आशौच ,, उपेक्षा करने पर पशु के स्वामी विशेष प्रकार की मृत्यु से आशौच का दण्ड ,, का निषेध ३९७ जार को छोड़ देने पर दण्ड ३८८ राजा की निन्दा करनेवाले का दण्ड ,,