यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 101, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध आठवां अध्याय उपयामगृहीतोस्यग्नये त्वा वर्चस ऽ एष ते योनिरग्नये त्वा वर्चसे. अग्ने वर्चस्विन्वर्चस्वाँस्त्वं देवेष्वसि वर्चस्वानहं मनुष्येषु भूयासम्.. (३८) हे अग्नि! आप अपना काम करने में कुशल व पवित्र हैं. आप हमें पूरा वर्चस्व दीजिए. आप हमें श्रेष्ठ वीर्यवान बनाइए. आप हमारे लिए धन धारिए. आप हमें पोषण दीजिए. हे सोम! आप को अग्नि के लिए कलश में ग्रहण करते हैं. हम वर्चस्व के लिए आप को ग्रहण करते हैं. यह आप का मूल स्थान है. आप वर्चस्वियों में वर्चस्ववान देव हैं. हमें भी इसी तरह मनुष्यों में बारबार वर्चस्वी बनाइए. ( ३८ ) उत्तिष्ठन्नोजसा सह पीत्वी शिप्रे अवेपयः. सोममिन्द्र चमू सुतम्. उपयामगृहीतोसीन्द्राय त्वौजस ऽ एष ते योनिरिन्द्राय त्वौजसे. इन्द्रौजिष्ठौजिष्ठस्त्वं देवेष्वस्योजिष्ठोऽहं मनुष्येषु भूयासम्.. (३९) हे इंद्र देव! आप ओज के साथ उठिए. आप सुंदर ठोड़ी वाले हैं. आप इस पेय का पान कीजिए. हे सोम! इंद्र के लिए आप को चुआ रहे हैं. सोम को इंद्र देव के लिए कलश में ग्रहण किया गया है. यह इंद्र देव का मूल निवास है. हम ओज के लिए आप को ग्रहण करते हैं. इंद्र देव ओजवान हैं. वे देवताओं में ओजवान हैं, वैसे ही हम मनुष्यों में ओजवान हो जाएं. ( ३९ ) अदृश्रमस्य केतवो वि रश्मयो जनाँ २ अनु. भ्राजन्तो अग्नयो यथा. उपयामगृहीतोसि सूर्याय त्वा भ्राजायैष ते योनिः सूर्याय त्वा भ्राजाय. सूर्य भ्राजिष्ठ भ्राजिष्ठस्त्वं देवेष्वसि भ्राजिष्ठोहं मनुष्येषु भूयासम्.. (४०) अदृश्य रश्मियों ( किरणों ) की अग्निपताका अनुकरण करती है. वह मनुष्यों को नहीं दिखाई देती है. आप को सूर्य के लिए कलश में ग्रहण किया है. आप चमकते रहिए. कलश आप का मूल स्थान है. सूर्य प्रकाशमान है. वह देवों में प्रकाशमान है, वैसे ही हम मनुष्यों में प्रकाशमान हो जाएं. ( ४० ) उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः. दृशे विश्वाय सूर्यम्. उपयामगृहीतोसि सूर्याय त्वा भ्राजायैष ते योनिः सूर्याय त्वा भ्राजाय.. (४१) ये सूर्य की किरणें विश्वविख्यात हैं. ये दिव्यता वहन करती हैं. सूर्य की किरणें सारे संसार को दृष्टि प्रदान करती हैं. हे सोम! आप को कलश में ग्रहण किया है. आप को प्रकाशमान सूर्य के लिए ग्रहण किया है. यही आप का मूल स्थान है. आप सूर्य के लिए प्रकाशित होइए. ( ४१ ) यजुर्वेद - १०१