यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 146, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध बारहवां अध्याय प्रकाशित करते हैं. वे स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक के मध्य चमकते हैं. ( ३३ ) प्र प्रायमग्निर्भरतस्य शृण्वे वि यत्सूर्यो न रोचते बृहद्भाः. अभि यः पूरुं पृतनासु तस्थौ दीदाय दैव्यो अतिथिः शिवो नः.. (३४) अग्नि द्वारा बुलाने के लिए बोले गए मंत्र को सुनते हैं. अग्नि सूर्य के समान भासित होते हैं. वे युद्ध में पुरु के सहायक रहे. वे राजा, दिव्य और हमारे अतिथि हैं. हमारे प्रति कल्याणकारी होने की कृपा करें. ( ३४ ) आपो देवीः प्रतिगृह्णीत भस्मैतत्स्योने कृणुध्व १४ सुरभा ऽ उ लोके. तस्मै नमन्तां जनयः सुपत्नीर्मातेव पुत्रं बिभृताप्स्वेनत्.. (३५) हे जलदेवी! आप इस भस्म को स्वीकारने और इस से लोकों को सुगंधित बनाने की कृपा कीजिए. वरुण देव पत्नियों सहित इस के प्रति नमें तथा इसे उसी प्रकार धारें, जैसे माता पुत्र को धारण करती है. ( ३५ ) अप्स्वग्ने सधिष्टव सौषधीरनु रुध्यसे. गर्भे सञ्जायसे पुनः.. (३६) हे अग्नि! जल में आप की सहस्थिति है. आप जल के साथ ओषध धारण करते हैं. वनस्पतियों के गर्भ से बारबार प्रकट होते हैं. ( ३६ ) गर्भो अस्योषधीनां गर्भो वनस्पतीनाम्. गर्भो विश्वस्य भूतस्याग्ने गर्भो अपामसि.. (३७) हे अग्नि! आप ओषधियों का गर्भ हैं. आप वनस्पतियों का गर्भ हैं. आप सभी प्राणियों का गर्भ हैं. आप सभी जलों का गर्भ हैं. ( ३७ ) प्रसद्य भस्मना योनिमपश्च पृथिवीमग्ने. स १४ सृज्य मातृभिष्ट्वं ज्योतिष्मान् पुनरा सदः.. (३८) हे अग्नि! भस्म से आप अपने मूल स्थान पृथ्वी को प्राप्त होइए. आप जल के साथ मिलिए और पुनः ज्योतिष्मान होइए. आप पुनः अपने सदन में प्रवेश कीजिए. ( ३८ ) पुनरासद्य सदनमपश्च पृथिवीमग्ने. शेषे मातुरथोपस्थेन्तरस्या १४ शिवतमः.. (३९) हे अग्नि! आप पुनः अपने सदन में प्रवेश कीजिए. आप पृथ्वी पर ऐसे शयन कर रहे हैं, जैसे संतान मां की गोद में सो रही हो. आप हमारे प्रति कल्याणकारी होने की कृपा कीजिए. ( ३९ ) पुनरुर्जा निवर्त्तस्व पुनरग्न ऽ इषायुषा. पुनर्नः पाह्य १४ हसः.. (४०) १४६ - यजुर्वेद