भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 177, कुल 421 में से

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पृष्ठ 177

पूर्वार्ध चौदहवां अध्याय यानी बारह महीने, पांच ऋतु, एक वर्ष रूप अंगों से आप की स्थापना करते हैं. तप स्वरूप उन्नीस स्तोम से देवताओं की स्थापना करते हैं. बारह महीने, सात ऋतु, संवत्सर रूप बीस संख्या वाले देवता का मनन कर के संवत्सर रूप बीस संख्या वाले हम द्वाविंश स्तोम वाले वर्च देवता का ध्यान कर के उस की स्थापना करते हैं. तेईस स्तोम वाले संभरण देवता का ध्यान कर के उस की स्थापना करते हैं. प्रजा को चौबीस स्तोम उपजाते हैं. हम योनि देव का ध्यान कर के आप की स्थापना करते हैं. त्रिणव ओजस्वी देव का ध्यान कर के आप की स्थापना करते हैं. यज्ञ हेतु उपयोगी इकतीस स्तोम का ध्यान कर के आप की स्थापना करते हैं. यज्ञ देवता का ध्यान कर के आप की स्थापना करते हैं. तैंतीस प्रतिष्ठा स्वरूप देव की स्थापना करते हैं. सूर्य वास वाले चौंतीस देव का ध्यान कर के आप की स्थापना करते हैं. ब्रह्म विष्टप पैंतीस देव का स्मरण कर के आप की स्थापना करते हैं. (२३) अग्नेर्भागोसि दीक्षाया ऽ आधिपत्यं ब्रह्म स्पृतं त्रिवृत्स्तोम ऽ इन्द्रस्य भागोसि विष्णोराधिपत्यं क्षत्र १७ स्पृतं पञ्चदश स्तोमो नृचक्षसां भागोसि धातुराधिपत्यं जनित्र १७ स्पृत १७ सप्तदश स्तोमो मित्रस्य भागोसि वरुणस्याधिपत्यं दिवो वृष्टिर्वात स्पृत ऽ एकवि १७ श स्तोमः.. (२४) इष्टका अग्नि देव का भाग है. आप दीक्षा के आधिपत्य में हैं. ब्राह्मण त्रिवृत स्तोम से मृत्यु से बचे त्रिवृत स्तोम से आप की स्थापना करते हैं. इंद्र देव के भाग हैं. विष्णु के आधिपत्य में हैं. क्षत्रियों की मृत्यु से रक्षा पंचदश स्तोम से हुई. हम पंचदश स्तोम से आप की स्थापना करते हैं. आप मनुष्यों के निरीक्षक देव का भाग हैं. आप धाता के आधिपत्य में हैं. वैश्य सप्तदश स्तोम द्वारा मृत्यु से बचें. हम सप्तदश स्तोम से आप की स्थापना करते हैं. आप मित्र देव का भाग हैं. आप वरुण देव के आधिपत्य में हैं. एकविंश स्तोम से स्वर्गलोक से संबंधित वर्षा की रक्षा हुई एकविंश स्तोम से स्वर्गलोक से संबंधित वायु की रक्षा हुई. एकविंश स्तोम से आप की स्थापना करते हैं. (२४) वसूनां भागोसि रुद्राणामाधिपत्यं चतुष्पात् स्पृतं चतुर्वि १७ श स्तोम ऽ आदित्यानां भागोसि मरुतामाधिपत्यं गर्भा स्पृताः पञ्चवि १७ श स्तोमोदित्यै भागोसि पूष्ण ऽ आधिपत्यमोज स्पृतं त्रिणव स्तोमो देवस्य सवितुर्भागोसि बृहस्पतेराधिपत्य १७ समीचीर्दिश स्पृताश्चतुष्टोम स्तोमः.. (२५) हे इष्टके! आप वसुगणों के भाग हैं. इसलिए आप पर रुद्रों का अधिकार है. आप ने चौबीसवें स्तोम द्वारा पशुओं का संरक्षण किया है. हम आप को यहां स्थापित करते हैं. आप आदित्यगण के भाग हैं. इसलिए मरुद्गणों का आप पर अधिकार है. पच्चीसवें स्तोम द्वारा गर्भस्थ भ्रूणों की रक्षा हुई. हम आप को यहां स्थापित करते हैं. हे इष्टके! आप अदिति के भाग हैं. अतः पूषा देव का आप पर अधिकार है. आप ने त्रिणव स्तोम से प्रजाओं के ओज की रक्षा की है. हम उन स्तोम यजुर्वेद - १७७