यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 226, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध अठारहवां अध्याय हो. यज्ञ से सब वैभव में बढ़ोतरी हो. यज्ञ से सब भद्रता में बढ़ोतरी हो. यज्ञ से सब श्रेय में बढ़ोतरी हो. यज्ञ से सब वास सुख में बढ़ोतरी हो. यज्ञ से सब यश में बढ़ोतरी हो. यज्ञ हमें सर्वविध फलीभूत हो. ( ८ ) ऊर्क् च मे सूनृता च मे पयश्च मे रसश्च मे घृतं च मे मधु च मे सग्धिश्च मे सपीतिश्च मे कृषिश्च मे वृष्टिश्च मे जैत्रं च म ऽ औद्भिद्यं च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. ( ९ ) यज्ञ हमें फलीभूत हो. यज्ञ से अन्न की प्राप्ति हो. यज्ञ से अच्छी वाणी की प्राप्ति हो. यज्ञ से पेय की प्राप्ति हो. यज्ञ से रस की प्राप्ति हो. यज्ञ से घी की प्राप्ति हो. यज्ञ से मधु की प्राप्ति हो. हम संबंधियों के साथ भोजन करें. हम संबंधियों के साथ पीएं. वर्षा हमारी कृषि को फलीभूत व बढ़ोतरी करे. हम शत्रुओं का भेदन करें. यज्ञ हमें सर्वविध फलीभूत हो. ( ९ ) रयिश्च मे रायश्च मे पुष्टं च मे पुष्टिश्च मे विभु च मे प्रभु च मे पूर्णं च मे पूर्णतरं च मे कुयवं च मेक्षितं च मेन्नं च मेक्षुच्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. ( १० ) यज्ञ से हमारे धन में बढ़ोतरी हो. यज्ञ से हमारी संपत्ति में बढ़ोतरी हो. हम धन से पुष्ट हों. हम वैभव से पुष्ट हों. हम प्रभु से पुष्ट हों. हम पूर्ण से पुष्ट हों. हम पूर्णतर से पुष्ट हों. हमारे यहां पशुओं के खाद्य में बढ़ोतरी हो. हमारे यहां अक्षय अन्न में व हमारी भूख में भी बढ़ोतरी हो. यज्ञ हमारे लिए सर्वविध फलीभूत हो. ( १० ) वित्तं च मे वेद्यं च मे भूतं च मे भविष्यच्च मे सुगं च मे सुपथ्यं च म ऽ ऋद्धं च म ऽ ऋद्धिश्च मे क्लृप्तं च मे क्लृप्तिश्च मे मतिश्च मे सुमतिश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. ( ११ ) यज्ञ से हमारे वित्त, ज्ञान, अतीत, भविष्य व अच्छे धन को बढ़ोतरी मिले. यज्ञ से हमारे पथ सुगम हों. यज्ञ से हमारे पथ के रोड़े समाप्त हों. यज्ञ से हमारे अच्छे कर्म, सामर्थ्य, सत्य, बुद्धि व सद्बुद्धि में बढ़ोतरी हो. यज्ञ हमारे लिए सर्वविध फलीभूत हो. ( ११ ) व्रीहयश्च मे यवाश्च मे माषाश्च मे तिलाश्च मे मुद्गाश्च मे खल्वाश्च मे प्रियङ्गवश्च मेणवश्च मे श्यामाकाश्च मे नीवाराश्च मे गोधूमाश्च मे मसूराश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. ( १२ ) यज्ञ से हमारे धान, जौ, उड़द, तिल, मूंग, चना, प्रियंग ( राई ), छोटे चावलों में बढ़ोतरी हो. यज्ञ से हमारे सावां चावल, नीवार, गेहूं, मसूर में बढ़ोतरी हो. यज्ञ हमें सर्वविध फलीभूत हो. ( १२ ) अश्मा च मे मृत्तिका च मे गिरयश्च मे पर्वताश्च मे सिकताश्च मे वनस्पतयश्च मे हिरण्यं च मेयश्च मे श्यामं च मे लोहं च मे सीसं च मे त्रपु च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. ( १३ ) २२६ - यजुर्वेद