यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 229, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध अठारहवां अध्याय यज्ञ से व्रत, तप, वर्षा, दिनरात व यज्ञ से ऊर्वष्ठि हमारे अनुकूल होने की कृपा करे. यज्ञ से बृहद्रथंतर हमारे अनुकूल होने की कृपा करें. यह यज्ञ सर्वविध फलीभूत होने की कृपा करे. ( २३ ) एका च मे तिस्रश्च मे तिस्रश्च मे पञ्च च मे पञ्च च मे सप्त च मे सप्त च मे नव च मे नव च म ऽ एकादश च म ऽ एकादश च मे त्रयोदश च मे त्रयोदश च मे पञ्चदश च मे पञ्चदश च मे सप्तदश च मे सप्तदश च मे नवदश च मे नवदश च म ऽ एकवि ꣳ शतिश्च म ऽ एकवि ꣳ शतिश्च मे त्रयोवि ꣳ शतिश्च मे त्रयोवि ꣳ शतिश्च मे पञ्चवि ꣳ शतिश्च मे पञ्चवि ꣳ शतिश्च मे सप्तवि ꣳ शतिश्च मे सप्तवि ꣳ शतिश्च मे नववि ꣳ शतिश्च मे नववि ꣳ शतिश्च म ऽ एकत्रि ꣳ शच्च म ऽ एकत्रि ꣳ शच्च मे त्रयस्त्रि ꣳ शच्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. (२४) यज्ञ से हम एक, तीन, पांच, पांच और सात, सात और नौ, नौ और ग्यारह, ग्यारह और तेरह, तेरह और पंद्रह, पंद्रह और सत्रह, उन्नीस और इक्कीस, तेईस और पच्चीस स्तोम इच्छा को फलीभूत करें. यज्ञ से हम पच्चीस और सत्ताईस, सत्ताईस और उनतीस, उनतीस और इकतीस, इकतीस और तैंतीस स्तोम इच्छा को फलीभूत करें. यज्ञ सर्वविध फलीभूत होने की कृपा करे. ( २४ ) चतस्रश्च मेष्टौ च मेष्टौ च मे द्वादश च मे द्वादश च मे षोडश च मे षोडश च मे वि ꣳ शतिश्च मे वि ꣳ शतिश्च मे चतुर्वि ꣳ शतिश्च मे चतुर्वि ꣳ शतिश्च मेष्टावि ꣳ शतिश्च मेष्टावि ꣳ शतिश्च मे द्वात्रि ꣳ शच्च मे द्वात्रि ꣳ शच्च मे षट्त्रि ꣳ शच्च मे षट्त्रि ꣳ शच्च मे चत्वारि ꣳ शच्च मे चत्वारि ꣳ शच्च मे चतुश्चत्वारि ꣳ शच्च मे चतुश्चत्वारि ꣳ शच्च मेष्टाचत्वारि ꣳ शच्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. (२५) यज्ञ से चार और आठ, आठ और बारह, बारह और सोलह, सोलह और बीस, बीस और चौबीस, चौबीस और अट्ठाईस स्तोम अभीष्ट प्राप्ति की कृपा करें. यज्ञ से अट्ठाईस और बत्तीस स्तोम, बत्तीस और छत्तीस, छत्तीस और चालीस, चालीस और चवालीस व चवालीस और अड़तालीस स्तोम अभीष्ट प्राप्ति की कृपा करें. यज्ञ सर्वविध हमारे लिए फलीभूत हो. ( २५ ) त्र्यविश्च मे त्र्यवी च मे दित्यवाट् च मे दित्यौही च मे पञ्चाविश्च मे पञ्चावी च मे त्रिवत्सश्च मे त्रिवत्सा च मे तुर्यवाट् च मे तुर्यौही च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. (२६) यज्ञ से तीन से आधे वर्ष का बछड़ा, तीन वर्ष की बछिया, दो वर्ष का बछड़ा, बछिया, ढाई वर्ष का बछड़ा व बछिया. यज्ञ से तीन वर्ष का बैल व गाय सहायक हो. यज्ञ से साढ़े तीन वर्ष का बैल व गाय सहायक हो. यज्ञ सर्वविध हमारे लिए फलीभूत हो. ( २६ ) पष्ठवाट् च मे पष्ठौही च म ऽ उक्षा च मे वशा च म ऽ ऋषभश्च मे वेहच्च मेनड्वाँश्च मे धेनुश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्.. (२७) यजुर्वेद - २२१