यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 296, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध तेईसवां अध्याय हम निधिपति का आह्वान करते हैं. जगत् को आप ने बसाया है. आप हमारे होइए. आप संसार के गर्भधारी हैं. हम आप की इस गर्भधारण क्षमता को जानें. ( १९ ) ता ऽ उभौ चतुरः पदः संप्रसारयाव स्वर्गे लोके प्रोर्णुवाथां वृषा वाजी रेतोधा रेतो दधातु.. (२०) यज्ञ शक्ति और देव शक्ति दोनों से उम्मीद है कि वे अपने चारों पैरों का प्रसार करने की कृपा करें. दोनों शक्तियां स्वर्गलोक एवं पृथ्वीलोक में व्याप्त करने की कृपा करें. दोनों शक्तियां बलवान हैं. वे हमें बलशाली व वीर्यवान बनाएं. हमारे लिए शक्ति और शौर्य धारण करें. ( २० ) उत्सक्थ्या अव गुदं धेहि समज्रिं चारया वृषन्. य स्त्रीणां जीवभोजनः.. (२१) हे परम शक्ति! आप दुष्टों का दमन करने वाले व शक्तिमान हैं. जो व्यक्ति स्त्रियों से अपनी आजीविका कमाते हैं, अपना भोजन पाते हैं, आप उन को प्रताड़ना दीजिए. ( २१ ) यकासकौ शकुन्तिकाहालयिति वञ्चति. आहन्ति गभे पसो निगलगलीति धारका.. (२२) यह जल पक्षी की भांति प्रसन्नतादायी निनाद ( आवाज ) करता है. यह जल तेजोमय है. यह तेजस्वी जल कलकल निनाद करता है और शक्तिधारी है. ( २२ ) यकोसकौ शकुन्तक ऽ आहालयिति वञ्चति. विवक्षत ऽ इव ते मुखमध्वर्यो मा नस्त्वमभि भाषथाः.. (२३) उपर्युक्त तेज के प्रभाव से बोलने के इच्छुक मुंह पक्षी की तरह निरंतर शब्द करते हैं. उन से निवेदन है कि वे यज्ञ के बारे में निरर्थक बात न करें. ( २३ ) माता च ते पिता च ते ऽ ग्रं वृक्षस्य रोहतः. प्रतिलामीति ते पिता गभे मुष्टिमत् ँष् सयत्.. (२४) हे यजमान! आप के माता और पिता वृक्ष के आगे के भाग से ऊर्ध्व गति पाते हैं. ऊर्ध्वलोक से आप के पूर्वज बादल से वर्षा कर के शोभा बढ़ाते हुए ऐसे प्रतीत होते हैं, मानो वे कहते हैं, हम आप से प्रसन्न हैं. ( २४ ) माता च ते पिता च तेग्रे वृक्षस्य क्रीडतः. विवक्षत ऽ इव ते मुखं ब्रह्मन्मा त्वं वदो बहु.. (२५) आप के माता और पिता वृक्ष के आगे के भाग पर खेलते हैं. आप बोलने के अधिक इच्छुक प्रतीत होते हैं. आप अधिक मत बोलें. ( २५ ) २९६ - यजुर्वेद