भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 337

उत्तरार्ध अट्ठाईसवां अध्याय यज्ञ कीजिए ताकि वे आप के लिए धन धारण कर सकें. आप को धन प्रदान कर सकें. ( १४ ) देवी जोष्ट्री वसुधिती देवमिन्द्रमवर्धताम्. अयाव्यन्याघा द्वेषा १७ स्यान्या वक्षद्वसु वार्याणि यजमानाय शिक्षिते वसुवने वसुधेयस्य वीतां यज.. ( १५) देवी जोशीली, धन धारण करने वाली, इंद्र देव की बढ़ोत्तरी करने वाली, द्वेषों व पापों को दूर करने वाली हैं. यजमान के लिए धन धारने की कृपा कीजिए. यजमान को धन प्राप्ति की शिक्षा दीजिए. यजमान इस सब के लिए यज्ञ करें. ( १५ ) देवी ऊर्जाहुती दुघे सुदुघे पयसेन्द्र मवर्धताम्. इषमूर्जमन्या वक्षत्सग्धि १७ सपीतिमन्‍या नवेन पूर्वं दयमाने पुराणेन नवमधातामूर्जमूर्जाहुती ऊर्जयमाने वसु वार्याणि यजमानाय शिक्षिते वसुवने वसुधेयस्य वीतां यज.. (१६) देवी ने इंद्र देव को ऊर्जस्वी बनाया. पयस से उन की बढ़ोत्तरी की. देव अन्न शक्ति से युक्त हैं. देवी जल शक्ति से युक्त हैं. देवी दयामयी, पुरातन तत्त्वों को जानने वाली हैं व नए और पुराने अन्न को धारण करती हैं. वे यजमान के लिए महान् ऐश्वर्य प्रदान करने उस को स्थायित्व प्रदान करने की कृपा करें. देवगण हव्यपान की कृपा करें. यजमान गण इन के लिए यज्ञ करें. ( १६ ) देवा दैव्या होतारा देवमिन्द्रमवर्धताम्. हताघश १७ सावाभार्ष्टां वसु वार्याणि यजमानाय शिक्षितौ वसुवने वसुधेयस्य वीतां यज.. (१७) होता दिव्य है. वह ( यज्ञ से ) देवी की बढ़ोत्तरी करने की कृपा करे. होता इंद्र देव की बढ़ोत्तरी करने की कृपा करें. देव और देवी हमारा वैभव बढ़ाने की कृपा करें. देवी और देव यजमान को वैभव प्रदान कराने के लिए हवि ग्रहण करने की कृपा करें. देव और देवी उस वैभव को स्थायी बनाने की कृपा करें. हे यजमान! आप भी इसीलिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( १७ ) देवीस्तिस्रस्तिस्रो देवीः पतिमिन्द्रमवर्धयन्. अस्पृक्षद्भारती दिव १७ रुदैर्यज्ञ १७ सरस्वतीडा वसुमती गृहान् वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. (१८) इंद्र देव पालक हैं. तीन देवियों ने उन की बढ़ोत्तरी की. भारती देवी स्वर्गलोक का व रुद्र यज्ञ का स्पर्श करते हैं. सरस्वती, इड़ा और वसुमती घर का स्पर्श करती हैं. तीनों देवियां यजमान के लिए धन धारने की कृपा करें. यजमान इस के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( १८ ) यजुर्वेद - ३३७