भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 368, कुल 421 में से

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पृष्ठ 368

तैंतीसवां अध्याय अस्याजरासो दमामरिन्त्रा ऽ अर्चद्धूमासो अग्नयः पावकाः. श्वितीचयः श्वात्रासो भुरण्यवो वनर्षदो वायवो न सोमाः.. (१) यजमान ने जो अग्नियां प्रज्वलित की हैं, वे अजर हैं. वे दुश्मनों से त्राण करने वाली, पूजनीय, धूम्रमय, पवित्र, शीघ्र फल देने वाली व भुवन को पालने वाली हैं. वे वन के समान व्यापक व वायु के समान प्राणदायी हैं. वे अग्नियां सोम की तरह हमारी इच्छा पूरी करने की कृपा करें. (१) हरयो धूमकेतवो वातजूता ऽ उप द्यवि. यतन्ते वृथगग्नयः.. (२) अग्नियां हरी हैं. धुएं की पताका वाली और वायु से बढ़ोतरी पाने वाली हैं. स्वर्गलोक में जाने के लिए बारबार प्रयत्न करती हैं. (२) यजा नो मित्रावरुणा यजा देवाँ २ ऋतं बृहत्. अग्ने यक्षि स्वं दमम्.. (३) हे अग्नि! आप मित्र, वरुण व अन्य देवताओं के लिए यजन करने की कृपा कीजिए. आप सत्यवान व विशाल हैं. आप अपने घर को यज्ञ के शुभ कार्यों से युक्त करने की कृपा कीजिए. (३) युक्ष्वा हि देवहूतमाँ २ अश्वाँ २ अग्ने रथीरिव. नि होता पूर्व्यः सदः.. (४) हे अग्नि! जैसे सारथी रथ में घोड़े जोतता है, वैसे ही देवों को (यज्ञ में) आमंत्रित करने के लिए आप घोड़ों को रथ में जोतिए. आप चिरकाल से ही यज्ञ में बुलाए जाते हैं. (४) द्वे विरूपे चरतः स्वर्थे अन्यान्या वत्समुप धापयेते. हरिरन्यस्यां भवति स्वधावाञ्छुक्रो अन्यस्यां ददृशे सुवर्चाः.. (५) रात्रि और दिवस अपने श्रेष्ठ काम के लिए वैसे ही विचरते हैं, जैसे अलगअलग रूपरंग वाली स्त्रियां विचरती हैं. रात्रि हरी (काली) है. रात्रि के स्वधावान चमकीले पुत्र चंद्रमा हुए. दूसरी के श्रेष्ठ वर्चस्वी पुत्र सूर्य हुए. ऐसा देखा (कहा) जाता है. (५) ३६८ – यजुर्वेद 632/23