भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 383

उत्तरार्ध तैंतीसवां अध्याय सभी देव मनन तथा समन्वयशील हैं. सभी देव हमें सभी वैभव प्रदान करने की कृपा करें. सभी देव आज हमें और भविष्य में हमारी पीढ़ियों के लिए वैभव प्रदाता हों. ( ९४ ) अपाधमदभिशस्तीरशास्तिहाथेन्द्रो द्युम्न्याभवत्. देवास्त ऽ इन्द्र सख्याय येमिरे बृहद्भानो मरुद्गण.. (९५) इंद्र देव उद्दंडों को दंडित करते हैं. वे हिंसा को दूर भगाते हैं. उन से सभी देवगण मित्रता चाहते हैं. हे मरुद्गण! आप की सभी देवता मित्रता चाहते हैं. हे अग्नि देव! आप की सभी देवगण मित्रता चाहते हैं. ( ९५ ) प्र व ऽ इन्द्राय बृहते मरुतो ब्रह्मार्चत. वृत्र ँह हनति वृत्रहा शतक्रतुर्वज्रेण शतपर्वणा.. (९६) हे यजमानो! आप इष्टदेव व मरुद्गण के लिए विस्तृत मंत्र उच्चारिए. इंद्र देव वृत्रासुरनाशी हैं. वे सौ तीखे बाणों वाले वज्र से वृत्रासुर का नाश करते हैं. वे सैकड़ों यज्ञ कर्ता हैं. ( ९६ ) अस्येदिन्द्रो वावृधे वृष्ण्य ँह शवो मदे सुतस्य विष्णवि. अद्या तमस्य महिमानमायवोऽनुष्टुवन्ति पूर्वथा. इमा ऽ उ त्वा यस्यायमय ँह सहस्रमूर्ध्व ऽ ऊ षु ण:... (९७) इंद्र देव सोमरस से मदमस्त हो कर यजमान के बल की बढ़ोतरी करते हैं. वे एवं विष्णु देव यजमान पूर्व ऋषियों की भांति ही आप की महिमा स्तोत्रों से अभिव्यक्त हैं. ( ९७ ) यजुर्वेद - ३८३