भारतकोश
यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

स्वामी अड़गड़ानन्द द्वारा

स्रोत: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (उद्गम)

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• भगवान महावीर ( २६०० वर्ष पूर्व-जैनग्रन्थ )- आत्मा ही सत्य है। कठोर तपस्या से इसी जन्म में जाना जा सकता है। • गौतम बुद्ध ( २५०० वर्ष पूर्व-महापरिनिब्बान सुत्त )- मैंने उस अविनाशी पद को प्राप्त किया है, जिसे पूर्व महर्षियों ने प्राप्त किया था। यही मोक्ष है। • मसीह ईसा ( २००० वर्ष पूर्व-ईसाई धर्म )- ईश्वर प्रार्थना से प्राप्त होता है। मेरे अर्थात् सद्गुरु के पास आओ, इसलिये कि ईश्वर के पुत्र कहलाओगे। • हज़रत मुहम्मद सलल्लाहु. ( १४०० वर्ष पूर्व-इस्लाम धर्म )- ‘ला इलाह इल्लल्लाह मुहम्मदुर्र रसूलल्लाह’- जर्रे-जर्रे में व्याप्त खुदा (ईश्वर) के सिवाय कोई पूजनीय नहीं है। मुहम्मद अल्लाह के सन्देशवाहक हैं। • आदि शंकराचार्य ( १२०० वर्ष पूर्व )- जगत् मिथ्या है। इसमें सत्य है केवल हरि और उनका नाम। • सन्त कबीर ( ६०० वर्ष पूर्व )- राम नाम अति दुर्लभ, औरे ते नहिं काम। आदि अन्त औ युग-युग, रामहि ते संग्राम।। राम से संघर्ष करो, वही कल्याणकारी हैं। • गुरु नानक ( ५०० वर्ष पूर्व )- ‘एक ओंकार सतगुरु प्रसादि।’ एक ओंकार ही सत्य है; किन्तु वह सद्गुरु की कृपा का प्रसाद है। • स्वामी दयानन्द सरस्वती ( २०० वर्ष पूर्व )- अजर, अमर, अविनाशी एक परमात्मा की उपासना करें। उस ईश्वर का मुख्य नाम ओम् है। • स्वामी श्री परमानन्द जी ( सन् १९११-१९६९ ई० )- भगवान जब कृपा करते हैं तो शत्रु मित्र हो जाते हैं, विपत्ति सम्पत्ति हो जाती है। भगवान सर्वत्र से देखते हैं। ।। ॐ ।।