सामग्री पर जाएँ
भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1170, कुल 1734 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1170

३६२ ❊ योगवाशिष्ठ ❊

कई पदार्थ सत् और असत् भासित होते हैं, वैसे ही जाग्रत् में भासित होते हैं; पर फुरना दोनों का समान है। जैसे सत्य पदार्थों का स्फुरण हुआ है, वैसे ही असत् का भी हुआ है; स्फुरण से रहित सत्-असत् दोनों का अभाव हो जाता है। इसलिए यह विश्व भ्रम से सिद्ध हुआ है। जैसे जल में पवन से भँवर उठते हैं, वैसे ही आत्मा में स्फुरण होने से यह संसार भासित होता है, इसकी भावना त्यागकर स्वरूप में स्थित हो रहो।

तुमने जो प्रश्न किया कि एक मुहूर्त में युग कैसे भासित होता है, उसका उत्तर सुनो। जैसे किमी पुरुष को स्वप्न देख पड़ता है तो एक क्षण में बड़ा काल बीता जान पड़ता है तथा और का और भासित होता है सो आश्चर्य तो कुछ नहीं मोह से सब कुछ उत्पन्न होता है और भ्रम से देख पड़ता है। हे राम ! जैसे पुरुष सोते में तो एक आप ही होता है, पर उसमें नाना प्रकार का जगत् भ्रम से भासित होता है, वैसे ही स्वरूप के प्रमाद से जीव कई भ्रम देखता है। स्वरूप के जाने बिना भ्रम का अन्त नहीं होता। इससे तुम और प्रश्न किस निमित्त करते हो ? एक चित्त को स्थिर करके देखो तो न कोई संसार प्रतीत होगा; न कोई जन्म-मरण होंगे; न कोई बन्धन है, न मोक्ष है, केवल आत्मा ही भासित होगा। जब संकल्प उठता है, तब अविद्या से अपने को बँधा जानता है, संकल्प से रहित होने पर मुक्त और विद्या से मुक्त जानता है, पर आत्मस्वरूप ज्यों का त्यों है। उसे न बन्धन है, न छुटकारा है, न विद्या है और न अविद्या—वह केवल शान्तरूप है। इससे सर्वदा सब प्रकार, सब ओर से ब्रह्म ही है, दूसरा कुछ नहीं। हे राम ! जब स्वरूप की भावना होती है, तब संसार की भावना जाती रहती है। ये सब शब्द कल्पना में हैं कि यह पदार्थ है, यह नहीं है; आत्मा में यह कोई नहीं। जैसे पवन चलने और ठहरने पर एक ही है, वैसे ही विश्व चित्त का चमत्कार है। ब्रह्मा से चींटी तक ब्रह्मसत्ता ही अपने आपमें स्थित है और आत्मा ही के आश्रय से शब्द फुरते हैं। पर आत्मा फुरने और न फुरने में सम है; क्योंकि उससे भिन्न दूसरा कोई नहीं है।

योगवाशिष्ठ महारामायण · पृष्ठ 1170, कुल 1734 में से · BharatKosha