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भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1408, कुल 1734 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1408

* निर्वाण प्रकरण * ६०३

सृष्टि देखीं। जब मैं बोधदृष्टि से देखता, तब सब ब्रह्म ही दिखता। संकल्पदृष्टि से आत्मरूपी आदर्श में अनन्तसृष्टि देख पड़ती और चर्मदृष्टि से शिला ही दीखती। इस प्रकार मैं शिलाकोष में चला तो वहाँ मुझे घास, तृण, पत्थर, फल और फूलों की अनन्त सृष्टि दृष्टिगत होती और निसंकल्प आत्मदृष्टि से देखता तो अद्वैत आत्मा ही दीखता।

हे राम! इस प्रकार मैंने अनन्त सृष्टि देखीं। कहीं ऐसी सृष्टि देखी कि ब्रह्मा उपजे हैं और रचना रचने को समर्थ हुए हैं। कहीं ब्रह्मा ने चन्द्रमा सूर्य उपजाये हैं, और मर्यादा स्थापित की है। कहीं सम्पूर्ण पृथ्वी आदि तत्त्व उपजाये हैं। पर उसमें प्राण नहीं पड़े। कहीं समुद्र नहीं उपजे। कहीं आचार सहित सृष्टि दिखी। कहीं चन्द्रमा-सूर्य नहीं उपजे और कहीं उपजे थे। कहीं चन्द्रमा शिव से नहीं निकले। कहीं क्षीरसमुद्र मथा नहीं गया और अमृत नहीं निकला और लक्ष्मी, हाथी, घोड़ा, धन्वन्तरि वैद्य भी नहीं निकले। कहीं विष और अमृत नहीं निकला। कहीं देवता मरते हैं। कहीं क्षीरसमुद्र मथा गया है और उससे अमृत निकला है। कहीं प्रकाश नहीं होता; कहीं सदा प्रकाश ही रहता है। कहीं पृथ्वी पर पर्वतों के सिवा कुछ नहीं देख पड़ता। कहीं इन्द्र के वज्र से पर्वतों के पंख कटे थे और कहीं वे पर्वत उड़ते थे। कहीं प्राणियों को जरा-मृत्यु का भय नहीं होता, कल्पपर्यन्त ज्यों के त्यौं रहते हैं। कहीं प्रलय होता है। कहीं मेघ गर्जते हैं। कहीं सम्पूर्ण जल ही जल भरा है। कहीं आकाश ही है और प्राणी कोई नहीं दिखता। कहीं देवताओं के युद्ध होते थे; कहीं देवताओं को दैत्य जीतते थे; कहीं दैत्यों को देवता जीतते थे। कहीं देवता और दैत्यों में परस्पर प्रतीति थी। कहीं बलि और इन्द्र, रुद्र और वृत्तासुर का युद्ध होता था। कहीं मधुकैटभ दैत्य ब्रह्मा की कन्या से उत्पन्न होते थे। कहीं देखा सदा प्रसन्नता ही रहती है और लोग तीनों कालों की बातें जानते हैं। कहीं सदा शोकाकुल ही रहते हैं। कहीं सतयुग का समय है और दान, पुण्य, तप होते हैं। कहीं कलियुग का समय है और प्राणी पाप में लिप्त हैं। कहीं अर्द्धयुग बीता था। कहीं राम और रावण का युद्ध होता