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भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1439, कुल 1734 में से

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पृष्ठ 1439

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  • योगवाशिष्ठ *

जिनका जल में भी निवास है। ये सुन्दर नागिनियों में आसक्त हैं, इसलिए वे भी आत्मानन्द में गिरे हुए हैं। निदान जितने प्राणी हैं, वे सब विषयों के सुख में लगे हुए हैं और आत्मपद से विमुख हैं। सब जातियों में विरले जीवन्मुक्त और ज्ञानवान् भी हैं—उन्हें सुनो।

देवताओं में ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र सदा आत्मानन्द में मग्न रहते हैं। चन्द्रमा, सूर्य, अग्नि, वायु, इन्द्र, धर्मराज, वरुण, कुबेर, ब्रहस्पति, शुक्र, नारद, कच आदि जीवन्मुक्त पुरुष हैं। सप्तऋषि, दक्षप्रजापति, सनक, सनन्दन, सनत्कुमार और सनातन जीवन्मुक्त हैं। और भी बहुत मुक्त हैं। सिद्धों में कपिलमुनि; यक्षों में विद्याधर और योगी और दैत्यों में हिरण्यकशिपु, प्रह्लाद, बलि, विभीषण, इन्द्रजित, मारिच, चित्रासुर और नमुचि आदि जीवन्मुक्त हैं। मनुष्यों में राजर्षि और ब्रह्मर्षि, नागों में शेषनाग, वासुकि नाग आदि जीवन्मुक्त हैं। ब्रह्मलोक, विष्णुलोक और शिवलोक में कोई कोई विरले जीवन्मुक्त हैं। हे राम! जाति जाति में जो जीवन्मुक्त हुए हैं, वे तुमसे संक्षेप में कहे हैं। जहाँ जहाँ देखता हूँ, वहाँ-वहाँ अज्ञानी ही बहुत हैं, ज्ञानवान् कोई विरला ही दिखता है। जैसे सब जगह वृक्ष बहुत हैं, परन्तु कल्पवृक्ष विरला होता है; वैसे ही संसार में अज्ञानी बहुत हैं, ज्ञानी कोई विरला है। हे राम! सूरमा और कोई नहीं, जिसकी आत्मपद में स्थिति हुई है वही सूरमा है और संसार समुद्र तरना उर्मी के लिए सुगम है।

इति श्रीयो० निर्वाण० मुक्तसंज्ञावर्णनं नाम द्विशताधिकसप्तसप्ततितमः सर्गः॥२०७॥

वशिष्ठजी बोले, हे राम! जो विवेकी विरक्तचित्त पुरुष हैं, जिनके स्वरूप में स्थित हुई है, उनके राग, द्वेष, काम, क्रोध, मोह, अभिमान, दम्भ आदि विकार स्वाभाविक नष्ट हो जाते हैं। जैसे सूर्य के उदय से अन्धकार स्वाभाविक निवृत्त हो जाता है और जैसे बाण को देखकर कौआ भाग जाता है, वैसे ही विवेकरूपी बाण को देखकर विकाररूपी कौए भाग जाते हैं। विवेकी पुरुषों के हृदय में इतने गुण स्वाभाविक स्थित होते हैं कि वे किसी पर क्रोध नहीं करते, और जो करते भी दिखते हैं, सो किसी निमित्तमात्र जानना। उनके हृदय में सदा शान्ति

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