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भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1538, कुल 1734 में से

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पृष्ठ 1538

७३४ ❈ योगवाशिष्ठ ❈

होता है । हे वधिक ! यह सब जगत् चिन्मात्र है । जब चित्त संवित् फुरती है, तब स्वप्नरूप जगत् दिखता है और जब चित्तसंवित् स्फुरण से रहित होती है, तब सुषुप्ति होती है । ऐसे ही चित्त संवित् के जगने से सृष्टि होती है और चित्त के स्थिर होने में प्रलय हो जाता है । जैसे स्वप्न और सुषुप्ति आत्मा में कल्पित हैं, वैसे ही आत्मा में कल्पित सृष्टि और प्रलय आभासमात्र है । जगत् कुछ बना नहीं । जगने से जगत् भासित होता है, इससे जगत् भी आत्मरूप है । पञ्चतत्त्व भी आत्मा का नाम है । सदा अद्वैतरूप जगत् आभासमात्र है । जैसे आत्मा में साकार कल्पित है, वैसे ही निराकार भी कल्पित है । जैसे जीव स्वप्न में किसी को साकार और किसी को निराकार जानता है, पर दोनों स्फुरणमात्र हैं । जो फुरने से रहित है, वह आत्मसत्ता है । साकार और निराकार भी वही है । आत्मसत्ता ही इस प्रकार होकर भासित होती है और निराकार ही साकार होकर भासित होता है ।

हे वधिक ! सब जगत् जो तुझको दिखता है, वह चिन्मात्रस्वरूप है, भिन्न कुछ नहीं । परन्तु अज्ञान से नाना प्रकार के कार्य-कारण और जन्म-मरण आदि विकार दिखते हैं । वास्तव में न कोई जन्म है और न मरण । न कोई कार्य है और न कारण । यदि जीव मरता होता तो परलोक भी न देखता और अपने मरने को भी न जानता । जो मरकर परलोक देखता है, वह मरता नहीं । यदि मनुष्य मृतक हो तो पूर्व के संस्कार को न पावे और पूर्वस्मृति उसको न हो । पर तू तो पूर्वसंस्कार से क्रिया में प्रवृत्त होता है । प्रतियोग से तुझे पदार्थों की स्मृति भी हो आती है । फिर कर्मफल भोगता है । लोक में तो पुरुष मृतक नहीं होता, केवल भ्रम से मरण दिखता है और कारण-कार्यरूप पदार्थ दिखते हैं । जब मरकर परलोक देखता है, सुख-दुख भोगता है तो वह शरीर किसी कारण से नहीं बना । जैसे वह शरीर अकारण है, वैसे ही और जो आकार दिखते हैं, वे भी अकारण हैं-इसी से आभासमात्र हैं। जैसे स्वप्न के शरीर से जो नाना प्रकार की क्रियाएँ होती हैं और मनुष्य देश-देशान्तर देखता है, सो सब मिथ्या हैं; वैसे ही यह जगत् मिथ्या है

योगवाशिष्ठ महारामायण · पृष्ठ 1538, कुल 1734 में से · BharatKosha