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भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1569, कुल 1734 में से

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पृष्ठ 1569

❇ निर्वाण प्रकरण ❇

७६५

ऐसा ही हो । तब तेरा तप से दुर्बल हुआ शरीर फिर चन्द्रमा और सूर्य की नाईं प्रकाशमान होगा और घड़ी-घड़ी में योजनपर्यन्त बढ़ता जावेगा । जैसे गरुड़ तीक्ष्ण वेग मे चलता है, वैसे ही तेरा शरीर वेग से बढ़ता जावेगा । जैसे प्रातःकाल का सूर्य उदय होता है और प्रकाश बढ़ता जाता है, वैसे ही तेरा शरीर बढ़ता जावेगा और चन्द्रमा-सूर्य और अग्नि की नाईं प्रकाशमान होगा । ब्रह्माजी वर देकर अन्तर्धान हो जावेंगे और अपनी ब्रह्मपुरी में पहुँचेंगे । तेरा शरीर प्रलयकाल के समुद्र की नाईं बढ़ता जावेगा । जैसे वायु से सूखे तृण उड़ते हैं, वैसे ही तुझको ब्रह्माण्ड उड़ते दिखेंगे । तब तेरा शरीर बढ़ता-बढ़ता ब्रह्माण्ड खप्पर को भी नाँघ जावेगा । उसके आगे आकाश दिखेगा, फिर ब्रह्माण्ड दिखेगा । आगे फिर ब्रह्माण्ड दिखेगा । इसी प्रकार तू कई ब्रह्माण्ड नाँघता जावेगा, परन्तु तुझको खेद कुछ न होगा । निदान महाआकाश को भी तू ढक लेगा । जहाँ किसी तत्त्व का आवरण आवेगा, उसको तू वर प्राप्त देह से सूक्ष्मता सहित नाँघता जावेगा । हे बधिक ! इसी प्रकार तू कई सृष्टियाँ नाँघ जावेगा, जो इन्द्रजाल सदृश होंगी । जो दीर्घदर्शी हैं, वे इनको असत्य जानते हैं, और जो प्राकृत-जन हैं, उनको जगत् सत्य लगता है । ज्ञानवान् को जगत् मिथ्या भासित होता है । उस मिथ्या जगत् को तू नाँघता जावेगा और वहाँ जा पहुँचेगा, जहाँ अनन्तसृष्टि फुरती दिखेंगी । जैसे समुद्र में अनेक तरङ्ग उठते हैं, वैसे ही तुझको सृष्टियाँ उपजती देख पड़ेंगी, परन्तु जिसमें सृष्टि जगती है, उस अधिष्ठान का तुझको ज्ञान न होगा । वहाँ तू देखेगा कि मैं बड़ा उत्कृष्ट हुआ हूँ । जब तुझको ऐसा अभिमान होगा तब उसके साथ ही तप का फल वैराग्य भी उदय होगा । उसी के साथ यह संस्कार तेरे हृदय में जगेगा, जिससे तू उस शरीर का निरादर करेगा और कहेगा कि हा कष्ट ! हा कष्ट ! हे देव ! क्या शरीर तुमने मुझको दिया है ।

जगत् का अन्त लेने को मैंने शरीर बढ़ाया था, पर उसका तो अन्त कहीं न आया, क्योंकि अविद्या नष्ट नहीं हुई । अविद्या तब नष्ट होती

योगवाशिष्ठ महारामायण · पृष्ठ 1569, कुल 1734 में से · BharatKosha