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भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1637, कुल 1734 में से

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पृष्ठ 1637

=८३४ ❇ योगवाशिष्ठ ❇

तो उसका कारण कौन है ? उसका कारण कोई नहीं पाया जाता केवल चेतनता में संकल्परूप वासना जो दृढ़ हुई है, उसी के अनुसार शरीर भासित होता है और स्वर्ग-नरक में दुःख-सुख भासित होते हैं और तो कुछ वस्तु नहीं । सब पदार्थ संकल्प के रचे हुए हैं । वे सब आत्मरूप हैं । जैसे आकाश, व्योम और शून्य एक ही वस्तु के नाम हैं वैसे ही कोई जगत् कहो और कोई ब्रह्म कहो, इनमें भेद नहीं । फुरने का नाम जगत् है और न फुरने का नाम ब्रह्म है । जैसे वायु के चलने और ठहरने में भेद नहीं, वैसे ही ब्रह्म को संवेदन के फुरने और न फुरने में कुछ भेद नहीं । जो सम्यग्दर्शी हैं, उनको सब जगत् ब्रह्मस्वरूप दिखता है, इस कारण दोष किसी में नहीं रहता । और जो बड़ा कष्ट प्राप्त होता है । तो भी उन्हें खेद नहीं होता ।

जैसे कोई पुरुष स्वप्न में युद्ध करता है और उसको अपना जाग्रत स्वरूप स्मरण हो आता है, तो वह स्वप्न को स्वप्न जानता हुआ युद्ध करता है तो भी दुःख नहीं होता, वैसे ही जो पुरुष परमपद में जागा है, उसकी सब क्रियाएँ होती हैं, परन्तु वह अपने को अक्रिय जानता है । हे राम ! ज्ञानवान् की सब चेष्टाएँ होती हैं, परन्तु उसके निश्चय में क्रिया का अभिमान नहीं होता । जैसे नट सब स्वाँग भरता है, परन्तु अपने को स्वाँग से अलग और स्वाँग की क्रिया को असत्य जानता है, क्योंकि उसको अपना स्वरूप स्मरण रहता है, वैसे ही ज्ञानवान् सब क्रियाओं को असत्य जानता है । हे राम ! ये सब पदार्थ अजातजात हैं—उपजे नहीं । जैसे स्वप्न में पदार्थ दिखते हैं, परन्तु उपजे नहीं, अपना अनुभव ही इस प्रकार दिखता है, वैसे ही ये जगत् के पदार्थ भी अनुभवरूप जानो । हे राम ! बहुत शास्त्र और वेद मैं तुमको किस लिए सुनाऊँ और किस लिए पढूँ ? वेदान्त शास्त्रों का सिद्धान्त यही है कि वासना से रहित हो । इसी का नाम मोक्ष है । वासनासहित का नाम बन्धन है । वासना किसकी कीजिए ? यह सब सृष्टि तो अकारण भ्रममात्र है । इसमें क्या आस्था बढ़ाइये ? ये विषय तो स्वप्न के पर्वत हैं ।

इति श्रीयो० नि० ब्रह्मगीतावर्णननामद्विशताधिकैकषष्टितमस्सर्गः ॥२६१॥

योगवाशिष्ठ महारामायण · पृष्ठ 1637, कुल 1734 में से · BharatKosha