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भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1679, कुल 1734 में से

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पृष्ठ 1679

८७६ ❇ योगवाशिष्ठ ❇

जब स्पन्दनरूप होती है, तब स्पर्श से भासित होती है, वैसे ही संवेदन में जो दृश्य दिखता है, वह वही संवेदन दृश्य होकर भासित होता है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो द्रष्टा दृश्यरूप भासित होता है, तो दृश्य बाहर क्यों भासित होता है ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! इसी कारण इसे भ्रम कहा है कि यह अपने भीतर है और बाहर भासित होता है। जैसे स्वप्न की सृष्टि अपने ही भीतर होती है, पर वास्तव में न भीतर है और न बाहर, आत्मसत्ता ही अपने आपमें स्थित है, वैसे ही यह भी ज्यों का त्यों स्थित है, भीतर और बाहर भ्रम से भासित होती है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो आत्मसत्ता ज्यों की त्यों है और दृश्य भ्रम से भासित होता है तो खरगोश के सींग भी भ्रममात्र हैं, वे क्यों नहीं दिखते और अहं और त्वं क्यों दिखते हैं ? आखियों की चेष्टा तो प्रत्यक्ष दिखती है ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! अहं त्वं आदिक जगत् भी कल्पनामात्र है। जैसे खरगोश के सींग कल्पनामात्र हैं और आकाश में दूसरा चन्द्रमा भ्रम से दिखता है, वैसे ही यह जगत् भी भ्रममात्र है। जैसे मृगतृष्णा का जल और संकल्पनगर भ्रममात्र है, वैसे ही यह जगत् भ्रममात्र है, किसी कारण से नहीं उपजा। जैसे स्वप्न में खरगोश के सींग नहीं दिखते हैं और जगत् दिखता है, वैसे ही यह भ्रम है।

राम ने पूछा, हे मुनीश्वर ! हम भूत, भविष्यत् और वर्तमान तीनों कालों में जगत् की स्मृति अनुभव से जानते हैं, और कारण-कार्यभाव पाते हैं, तब आप उसको भ्रममात्र कैसे कहते हैं ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! मैं यह कहता हूँ कि जो कारण में कार्य होता है, वह सत्य होता है। तुम कहो कि जगत् का कारण क्या है अर्थात् जैसे बीज में वट होता है, वैसे ही इसका कारण कौन है ? राम बोले, हे भगवन् ! जगत् सूक्ष्म अणु से उपजता है और लीन भी सूक्ष्मतत्त्व के अणु में ही होता है। वशिष्ठजी ने पूछा, हे राम ! सूक्ष्म अणु किस से कहते हैं ? राम बोले, हे मुनीश्वर ! महाप्रलय में शुद्ध चिन्मात्र सत्ता शेष रहती है और उसी में अणु रहते हैं। वशिष्ठजी बोले, हे राम ! महाप्रलय किसको कहते हैं ? जहाँ सर्व शब्द और अर्थ का अभाव है, उसका नाम महाप्रलय है।