योगवाशिष्ठ महारामायण
Yog Vashishta Maha Ramayan
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)
पृष्ठ 757, कुल 1734 में से
संदर्भ में पढ़ें७६६ योगवाशिष्ठ ।
में चक्र तरङ्ग फुरते दृष्टि आते हैं तैसे ही इन्द्रियों में और इन्द्रियाँ फुर आती हैं, आधार आधेय से इनका सम्बन्ध होता है और चित्त इनके साथ मिलकर व्याकुल होता है । रूप, इन्द्रिय और मन इनका परस्पर भिन्न भाव है जैसे मुख, दर्पण और प्रतिबिम्ब भिन्न-भिन्न असंग हैं तैसे ही यह भी भिन्न-भिन्न असंग हैं परन्तु अज्ञान से मिले हुए भासते हैं । जैसे लाख से सोने, रूपे और चीनी का संयोग होता है तैसे ही अज्ञान से रूप अवलोक और मनस्कार का संयोग होता है । जब ज्ञान अग्नि से अज्ञान-रूपी लाख जल जावे तब परस्पर सब भिन्न-भिन्न हो जाते हैं और फिर किसी का दुःख सुख किसी को नहीं लगता । जैसे दो लकड़ी का संयोग लाख से होता है तैसे ही अज्ञान से विषय इन्द्रियों और मन का संयोग होता है और ज्ञानरूपी अग्नि से जब बिछुड़ जाते हैं तब फिर नहीं मिलते। जैसे माला के भिन्न-भिन्न दाने तागे में इकट्ठे होते हैं तैसे ही देह और इन्द्रियों में अज्ञान से मेल होते हैं और जब विचार करके तागा टूट पड़े तब भिन्न-भिन्न हो जावे फिर न मिले । हे रामजी ! जिन पुरुषों को आत्मविचार हुआ है वे ऐसे विचारते हैं कि हमको दुःख देनेवाला चित्त था और चित्त के नष्ट हुए आनन्द हुआ है । जैसे मन्दिर में दुःख देनेवाला पिशाच रहता है तब दुःख होता है। नहीं तो मन्दिर दुःख नहीं देता। पिशाच ही दुःख देता है, तैसे ही शरीररूपी मन्दिर में दुःख देनेवाला चित्त ही है। हे चित्त ! तूने मिथ्या मुझको दुःख दिया था । अब मैंने आपको जाना है । तू आदि भी तुच्छ है, अन्त भी तुच्छ है और वर्तमान में भी मिथ्या जीवों को दुःख देता है । जैसे मिथ्या परछाहीं बालक को बैताल होकर दुःख देती है—बड़ा आश्चर्य है ! हे चित्त ! तू तबतक दुःख देता है जबतक आत्मस्वरूप को नहीं जाना । जब आत्मस्वरूप का ज्ञान होता है तब तू कहीं दृष्टि नहीं होता । तू तो माया मात्र है। स्थिर हो अथवा जा, में अब तुझसे मोहित नहीं होता । तू तो मूर्ख जड़ और मृतक है और तेरा आकार अविचार में सिद्ध है । अब मैंने पूर्व का स्वरूप पाया है, तू तत्त्व नहीं भ्रान्तिमात्र है जो मूढ़ है वह तुझसे मोहित होता है, विचारवान् मोहित नहीं होता । जैसे दीपक से अन्धकार दृष्टि नहीं आता, तैसे ही ज्ञान से तू