योगवाशिष्ठ महारामायण
Yog Vashishta Maha Ramayan
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)
पृष्ठ 857, कुल 1734 में से
संदर्भ में पढ़ें४६ ⁂ योगवाशिष्ठ ⁂
देख पड़ती थी । जो वृक्ष और तृण थे, सब जल गये थे, एक बार ऐसी सृष्टि हुई कि उसमें चन्द्र और सूर्य न उपजे और दिन और रात्रि की गति कुछ जानी न जाती थी । पर कुछ सुमेरु के रत्नों का प्रकाश होता था । एक कल्प ऐसा हुआ है कि जिसमें देवताओं और दैत्यों का युद्ध हुआ था । जब दैत्यों की जीत हुई तो उन्होंने सब देवताओं को मनुष्यों की भाँति मार डाला । ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र, इन तीनों देवताओं के सिवा और सब सृष्टि उन्होंने जीती और बीस युग पर्यन्त उन्हीं की आज्ञा चली । एक बार ऐसा स्मरण आता है कि दो युग पर्यन्त पृथ्वी पर वृक्ष ही वृक्ष थे, और कुछ सृष्टि न थी । एक बार दो युग पर्यन्त पृथ्वी पर पर्वत ही पर्वत सघन हो रहे थे, और कुछ न था । एक बार ऐसा हुआ कि सब जल ही जल हो गया, और कुछ न देख पड़ता था, केवल सुमेरु पर्वत खंभे की नांई खड़ा था । एक बार अगस्त्य मुनि दक्षिण दिशा से आये । तब विन्ध्याचल पर्वत बढ़ा और उसने सब ब्रह्माण्ड चूर्ण कर दिया ।
हे मुनीश्वर ! बहुत कुछ स्मरण है, परन्तु संक्षेप में सुनो । एक समय सृष्टि में मनुष्य, देवतादिक कुछ न दीखते थे । एक बार ऐसी सृष्टि हुई कि ब्राह्मण मद्यपान करते थे, शूद्र बड़े हो बैठे थे और सब जीवों के धर्म उलट-पलट गये थे । एक बार ऐसी सृष्टि स्मरण आती है कि पृथ्वी में कोई पर्वत न देख पड़ता था । एक बार ऐसी सृष्टि उत्पन्न हुई कि सूर्य, चन्द्रमा, नक्षत्र, लोकपाल आदि कोई न उपजा । एक सृष्टि ऐसी हुई कि सबी उपजे । एक सृष्टि ऐसी हुई कि उसमें स्वामि-कार्तिक नहीं उपजे, दैत्य बढ़ गये और दैत्यों ही का राज्य हो गया । मुझको बहुत स्मरण है, कहाँ तक कहूँ । सूर्य, चन्द्रमा, नक्षत्र, इन्द्र, उपेन्द्र और लोकपालों के बहुत जन्म मुझको स्मरण हैं । जब हिरण्याक्ष को, जो वेदों को चुरा ले आया था, हरि ने मारा था वह भी स्मरण है और क्षीरसमुद्र मथना भी स्मरण है । ऐसी सृष्टि भी देखी है, जिसमें विष्णुजी का वाहन गरुड़ नहीं हुआ । ब्रह्माजी हंस वाहन के बिना और रुद्र बैल वाहन के बिना हुए हैं ।