योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)
Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi
अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंद्वितीयः ] दीपिकाभाषानुवादसहितम् १८९ शब्दस्पर्शरूपरसगन्धानां ग्रहणं प्रिये । कर्मेन्द्रियाणि १ वाक्पाणिपादपायुरुपस्थकाः ॥ वचनादानगमनविसर्गानन्दकं क्रमात् । कर्मेन्द्रियाणां व्यापाराः पञ्चानां २ परिकीर्तिताः ॥ एतानि दश बाह्यानि ३क्रमेणाभ्यन्तरत्रयम् । मनो बुद्धिरहङ्कारो ह्यन्तःकरणसंज्ञकम् ॥ इति । एतैः स्वावयवसंभूतैः सप्तविंशतिभिन्नक्षत्रविग्रहा जाता देवी ४स्वेच्छागृहीत- विग्रहा ।। ५८-६० ।। ५योगिनीत्वमथोच्यते । त्वगादिधातुनाथाभिर्डाकिन्यादिभिरप्यसौ ॥ ६० ॥ वर्गाष्टकनिविष्टाभिर्योगिनीभिश्च संयुता । योगिनीरूपमास्थाय राजते विश्वविग्रहा ६ ॥ ६१ ॥ [७त्वगादिधातवस्त्वगसृङ्मांसमेदोमज्जाशुक्राणि धातवः, तेषां नाथा अधिष्ठात्र्यो डाकिन्याद्याः—डाकिनी, राकिनी, लाकिनी, काकिनी, साकिनी, हाकिनी ८ च । वर्गा इन इन्द्रियों से क्रमशः शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध नामक विषय गृहीत होते हैं। वाक्, पाणि, पाद, पायु, उपस्थ नामक पाँच कर्मेन्द्रियों से क्रमशः वचन, आदान, विहरण, विसर्ग, आनन्द नामक विषयों का ग्रहण होता है। कर्मेन्द्रिय और ज्ञानेन्द्रिय बाह्य इन्द्रियाँ तथा मन, बुद्धि और अहंकार ये तीन अन्तःकरण कहलाते हैं ॥ अपने ही अवयवों के रूप में अभिव्यक्त इन तत्त्वों के कारण यह देवी अपनी ही इच्छा से २७ नक्षत्रों के रूप में दिखाई पड़ती है ॥५८-६०॥ अब इस देवी के योगिनीस्वरूप का वर्णन किया जा रहा है। यह विश्व- विग्रहा देवी त्वक् आदि धातुओं की स्वामिनी डाकिनी आदि से तथा आठ वर्गों की अधिष्ठात्री योगिनियों से संवलित होने के कारण योगिनी के रूप में भी विराजमान है ॥६०-६१॥ त्वक्, असृक्, मांस, मेदा, मज्जा और शुक्र ये छः धातु हैं। इनकी स्वामिनियाँ हैं—डाकिनी, राकिनी, लाकिनी, काकिनी, साकिनी और हाकिनी १। अ क च ट त प य १. याणां—झ. उ. । २. नामपि—ज. झ. उ. । ३. करणान्यन्तरं त्रयम्—झ. उ. । ४. स्वयं—ख. ने. ज. झ. उ. । ५. योगिनीनाम्—ने. च. छ. ज. झ. । ६. मोहिनी—ङ. च. उ. । ७. 'त्वगादि ''''तत्तद्' नास्ति—ख. ग. ने. ज. झ. ब. उ. । ८. इतः परम्— 'शाकिनी' इत्याधिकः पाठः सार्वत्रिकः । Courtesy: Shri Tarun Dwivedi, Surviving Son of Late Vraj Vallabh Dwivediji (15 Jul 1926 - 17 Feb 2012)