योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)
Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi
अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२० योगिनीहृदयम् [ पूजासंकेतः प्रकाशात्मनो मम विमर्शशक्तेर्विमर्शरूपिण्यास्तव । नित्योदिता पूजा नित्यं प्रत्यहम् उदिता विहिता १पूजा, त्रिभिर्भेदैर्व्यवस्थिता ॥ पूजानामान्याह— परा चाप्यरा गौरि तृतीया च परापरा ॥२॥ प्रथमा पूजा परा उत्तमोच्यते । परमशिवाद्वैतप्रथाप्रापकत्वादि२तरपूजाभ्या- मुत्तमत्वम् । तदुक्तं संकेतपद्धत्याम्— न पूजा बाह्यपुष्पादिद्रव्यैर्या ३विहिताऽनिशम् । स्वे ४महत्यद्वये धाम्नि सा पूजा या परा स्थितिः ॥ इति । अपरा द्वितीया पूजा भेदप्रथामात्रसारा बाह्यचक्रावरणार्चनरूपाऽधमा, “न पूजा बाह्यपुष्पादिद्रव्यैर्या ३विहिताऽनिशम्” इति ५पूर्वोक्तवचनात् । तृतीया पूजा परापरा बाह्यस्यान्तरे धाम्न्यद्वये चिल्लयभावनामयी मध्यमा, परापरात्मक- त्वात् ॥२॥ मुझ प्रकाशात्मक शिव की विमर्शरूपिणी शक्ति तुम हो । इस प्रकाशविमर्शात्मक स्वरूप की प्रतिदिन की जाने वाली पूजा तीन तरह से सम्पन्न होती है ॥ इनके नाम ये हैं— हे गौरि ! परा, अपरा इन दो भेदों के अतिरिक्त इसका परापरा नामक तीसरा भेद है ॥२॥ प्रथम पूजा का नाम १परा है । यह सर्वश्रेष्ठ है । परम शिव के साथ अद्वय बोध को जगाने वाली यह पूजा अन्य दो पूजाओं की अपेक्षा उत्कृष्ट है । संकेतपद्धति का कहना है— बाह्य पुष्प आदि द्रव्यों की सहायता से जो दिन-रात पूजा की जाती है, वह वास्तविक पूजा नहीं है । असली पूजा तो वह है, जिससे साधक अपने महान् अद्वय स्वरूप में प्रतिष्ठित हो जाय ॥ अपरा नाम की दूसरी पूजा केवल भेददृष्टि को बढ़ावा देने वाली है । इसमें केवल बाह्यचक्र की और तदन्तर्गत आवरण देवताओं की पूजा की जाती है । यह अधम कोटि की पूजा है । इसीलिये संकेतपद्धति के अभी उद्धृत वचन में इसको वास्तविक पूजा नहीं माना गया है । तीसरी पूजा परापरा नाम की है । इसमें बाह्य वस्तुओं का आन्तर अद्वय धाम में विलय किया जाता है, आन्तर चितिशक्ति से स्फुरित इस विश्व के १. 'पूजा' नास्ति-ख. ने. ज. झ. उ. । २. 'इतरपूजाभ्यामुत्तमत्वम्' नास्ति-ख. ने. ज. झ उ. । ३. प्रथिता-क. ने. झ. उ. । ४. महिम्रन्य-क. ग. । ५. 'पूर्वोक्त' नास्ति- ख. ने. ज. झ. उ. ।
- परा, परापरा और अपरा पूजा की व्याख्या हम शांभव, शाक्त और आणव उपायों के रूप में कर सकते हैं ।