भारतकोश
योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi

अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished485 पृष्ठ

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तृतीयः ] दीपिकाभाषानुवादसहितम् २३३ गणनाथो गजेन्द्रश्च शूर्पकर्णस्त्रिलोचनः । लम्बोदरो महानादश्चतुर्मूर्तिः सदाशिवः ॥१६॥ आमोदो दुर्मुखश्चैव सुमुखश्च प्रमोदकः² । एकपादो द्विजिव्हश्च शूरो वीरश्च षण्मुखः ॥१७॥ वरदो वामदेव³श्च वक्रतुण्डो द्वितुण्डक⁴ः । सेनानीर्ग्रामणीर्मत्तो विमत्तो मत्तवाहनः ॥१८॥ जटी मुण्डी तथा खड्गी वरेण्यो वृषकेतनः । भक्ष्य⁵प्रियो गणेशश्च मेघनादो गणेश्वरः ॥१९॥ ⁶[ग्रन्थान्तरे— ए(ते ? ता) गणेशवर्णानामेकपञ्चाशतः क्रमात् । श्रीश्च ह्रीश्चैव तुष्टिश्च शान्तिः पुष्टिः सरस्वती ॥ रमा मेधा तथा कान्तिः कामिनी मोहिनी बला । तीव्रा च ज्वालिनी नन्दा सुरसा कामरूपिणी ॥ उग्रा च जयिनी सत्या विघ्नेशानी सुरूपिणी । कामदा मदजिव्हा च विकटा घूर्णितानना ॥ वृषध्वज, गणनाथ, गजेन्द्र, शूर्पकर्ण, त्रिलोचन, लम्बोदर, महानाद, चतुर्मूर्ति, सदाशिव, आमोद, दुर्मुख, सुमुख, प्रमोदक, एकपाद, द्विजिव्ह, शूर, वीर, षण्मुख, वरद, वामदेव, वक्रतुण्ड, द्वितुण्डक, सेनानी, ग्रामणी, मत्त, विमत्त, मत्त- वाहन, जटी, मुण्डी, खड्गी, वरेण्य, वृषकेतन, भक्ष्यप्रिय, गणेश, मेघनाद और गणेश्वर ये ५१ गणेश हैं ॥१४-१९॥ [किसी दूसरे¹ ग्रन्थ में बताया गया है— इन ५१ संख्या के गणेशों की क्रम से ये ५१ शक्तियाँ हैं—श्री, ह्री, तुष्टि, शान्ति, पुष्टि, सरस्वती, रमा, मेधा, कान्ति, कामिनी, मोहिनी, बला, तीव्रा, ज्वालिनी, १. नन्दः-छ. ज. उ. । २. प्रबोधकः-झ. । ३. वामनश्चैव-उ. । ४. द्विरण्डकः-क. । ५. भक्त-झ. । ६. 'ग्रन्थान्तरे····शक्तयः' नास्ति-ख. ग. ज. ब. उ. ।

  1. आगे २० वें श्लोक की व्याख्या में अमृतानन्द ने गणेशों की शक्तियों में पहला नाम पुष्टि का दिया है और वहाँ कहा है कि इनके नामों की चर्चा अन्य आगमों की पद्धतियों में आ चुकी है, अतः हम यहाँ उनका विवरण नहीं दे रहे हैं । इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रस्तुत उद्धरण दीपिका का अंग नहीं बन सकता । इस उद्धरण में पहला नाम पुष्टि का नहीं है । अनेक हस्तलेखों में यह पाठ मिलता भी नहीं है ।