योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)
Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi
अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीयः ] दीपिकाभाषानुवादसहितम् २४९ तेषां चतुरस्राणाम्, अन्तर्देशे¹ “षोडशदलपद्माय नमः” ²इति मन्त्रेण ³दक्षिण- श्रोत्रपृष्ठादिस्थानानि संस्पृश्य व्यापकं विन्यसेदित्यर्थः ॥५०॥ तद्दलेषु न्यस्तव्याः शक्तीराह— तद्दले कामाकर्षिण्याद्याश्च विन्यसेत् ॥५०॥ तद्दले, जातावेकवचनम्, तद्दलेषु। कामाकर्षिण्याद्याः कामबुद्ध्यहङ्कार- शब्दस्पर्शरूपरसगन्धचित्तधैर्यस्मृतिनामबीजात्मामृतशरीराकर्षिण्यः,⁴ ता विन्य- सेत् ॥५०॥ तद्दलस्थानान्याह— दलानि दक्षिणश्रोत्रपृष्ठमंसं च कूर्परम् । करपृष्ठं चोरुजानुगुल्फपादतलं तथा ॥५१॥ वामपादतलाच्चै⁵वमेतदे⁶वाष्टकं मतम् । दलानीत्यादि तथेत्यन्तं स्पष्टम्। एवमुक्तप्रकारेण। वामपादतलादिवामश्रोत्र- पृष्ठान्तमेतदेवाष्टकं मतम्। स्थानाष्टकद्वयं षोडशदलानीत्यर्थः ॥५१-५२॥ इन चतुरस्रों के भीतर विद्यमान वृत्त प्रदेश में “षोडशदलपद्माय नमः” इस मन्त्र से दाहिने कान, दाहिनी पीठ आदि स्थानों का स्पर्श कर व्यापक न्यास करे ॥५०॥ इन दलों में न्यस्तव्य शक्तियों को बताते हैं— इन सोलह दलों में कामाकर्षिणी आदि सोलह शक्तियों का विन्यास करे ॥५०॥ 'तद्दले' यहाँ जाति में एकवचन है। उन सोलह दलों में कामाकर्षिणी, बुद्धि, अहंकार, शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध, चित्त, धैर्य, स्मृति, नाम, आत्मा, अमृत और शरीराकर्षिणी देवियों को विन्यस्त करे ॥५०॥ इन दलों के स्थान ये हैं— दाहिने कान की पीठ, कन्धा, कोहनी, करपृष्ठ (करभ), जंघा, घुटना, गुल्फ (टखना) और दक्षिण पादतल तथा वाम पादतल आदि ये ही आठ स्थान इनके दलों के हैं ॥५१-५२॥ 'दलानि' से 'तथा' पर्यन्त श्लोक का अर्थ स्पष्ट है। इसी तरह से वाम पादतल, गुल्फ, घुटना, जंघा, करपृष्ठ, कोहनी, कन्धा और बायें कान की पीठ ये ही स्थान विपरीत क्रम से विन्यस्त किये जाते हैं। इस तरह से दाहिने भाग और बायें भाग के ये ही आठ- आठ स्थान मिल कर सोलह दलों के प्रतिनिधि बनते हैं ॥५१-५२॥ १. देशे' नास्ति—ने. ज.। २. इत्यादि—ने. ज. झ. उ. । ३. षोडशदलदक्षिणतः श्रोत्र—ख. ने. ज. झ. उ. । ४. प्यन्ता—ख. ने. ज. झ. उ. । ५. न्येव—ने. ज. झ. । ६. दप्यष्टकं—ख. ने. च. छ. ज. झ. । Courtesy: Shri Tarun Dwivedi, Surviving Son of Late Vraj Vallabh Dwivediji (15 Jul 1926 - 17 Feb 2012)